कोविड के विकट दौर में हमारी भारतीय चिकित्सा पद्धति के उपचार को विश्वभर में मान्यता मिली थी। ख़ासियत है कि यह स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करने के साथ ही रोग कम करने में प्रभावी है। दुनिया भर में आयुर्वेद का मान बढ़ा है। यह बात राज्यपाल कलराज मिश्र ने डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय के छठे दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कही।
आधुनिक दृष्टि से शोध की जरूरत
उन्होंने आयुर्वेद के ज्ञान पर आधुनिक दृष्टि से शोध की आवश्यकता जताई। डिजीज डायग्नोस का जो सिस्टम आयुर्वेद में है, वह अन्यत्र किसी विज्ञान में नहीं है। आयुर्वेद विज्ञान से जुड़े प्राचीन ज्ञान का आधुनिक दौर में शोध कर हमें आगे बढा़ने की जरूरत है।
नाड़ी परीक्षण ज्ञान को बढ़ाएं
उन्होंने रोग परीक्षा एवं रोग निदान के लिए आयुर्वेद की प्राचीन भारतीय परम्परा में शामिल नाड़ी परीक्षण की महिमा बताते हुए आयुर्वेद के विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे आयुर्वेद के इस नाड़ी परीक्षण ज्ञान को बढ़ाए। आज नाड़ी विशेषज्ञों का अभाव है।
ग्लोबल पहचान बनाना जरूरी
उन्होंने विश्वविद्यालय के पंचकर्म विभाग में ‘‘सेन्टर ऑफ एक्सीलेन्स’’ सहित अन्य कार्य के लिए राज्य सरकार की ओर से स्वीकृत 44 करोड़ का जिक्र करते हुए कहा कि आयुर्वेद पंचकर्म के अंतर्गत इस सेंटर में उच्च कोटि की सेवाएं देते हुए इसकी ग्लोबल पहचान बनाएं।
942 विद्यार्थियों को उपाधि मिली
राज्यपाल मिश्र ने उपाधिधारक विद्यार्थियों को दीक्षा दी। 942 विद्यार्थियों को उपाधि मिली । प्रथम स्थान प्राप्त 06 आयुष स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को ‘चांसलर गोल्ड मेडल’ से तथा आयुर्वेद संकाय के टोपर्स को डाबर इण्डिया लिमिटेड स्वर्णपदक से सम्मानित किया। आयुर्वेद से संबंधित छह पुस्तकों का विमोचन किया। इनमें आयुर्वेदिक फोर्मूलरी ऑफ यूनिवर्सिटी फॉर्मेसी, आयुर्वेद परिचय एव सिद्धान्त तथा धनंजय आयुर्वेद संग्रह के साथ ही स्टूडेन्ट स्किल डवलपमेंट मॉड्युल की तीन पुस्तकें (प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय प्रोफेशनल) सम्मिलित हैं। आयोजन-स्थल नवनिर्मित सुश्रुत-सभागार का लोकार्पण भी किया गया।
आईआईटी, एम्स और कृषि विवि के साथ काम करना बेहतर
आयुर्वेद के विद्यार्थियों को अलग-अलग सेक्टर का ज्ञान देने के लिए जोधपुर आईआईटी, एम्स और कृषि विश्वविद्यालय से सहमति पत्र प्राप्त हुए हैं जो कि अच्छी पहल है।
आयुष विकास के लिए सरकार प्रयासरत
विशिष्ट अतिथि आयुष मंत्री डॉ. सुभाष गर्ग ने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बजट में आयुष के विकास के लिए गई महत्त्वपूर्ण घोषणाएं की हैं।
समारोह में विशिष्ट अतिथि एवं पूर्व कुलपति प्रो. बनवारीलाल गौड़ ने दीक्षान्त भाषण देते हुए आयुर्वेद को आज के युग एवं समय की मांग बताते हुए कहा कि आयुर्वेद द्वारा दी जाने वाली शुद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा आज विश्व में विख्यात हो रही है।
कुलपति ने प्रस्तुत किया प्रतिवेदन
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रदीप कुमार प्रजापति ने स्वागत भाषण प्रस्तुत करते हुए राज्यपाल एवं कुलाधिपति, आयुष मंत्री तथा अतिथियों का स्वागत किया और विश्वविद्यालय की गतिविधियों एवं उपलब्धियों पर प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। मंच संचालन विश्वविद्यालय की कुलसचिव सीमा कविया ने किया। समारोह में राज्यसभा सदस्य राजेंद्र गहलोत, जनप्रतिनिधिगण, प्रबन्ध मण्डल के सभी सदस्यगण मौजूद रहे।
इनको मिला स्वर्णपदक
- एम.डी./एम.एस. आयुर्वेद - डॉ. हरिशंकर शल्यतंत्र विषय, मदनमोहन मालवीय राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय, उदयपुर।
- बी.ए.एम.एस. - पीयूषिका शर्मा, भंवरलाल दूगड़ आयुर्वेद विश्वभारती, सरदारशहर।
- बी.एच.एम.एस. - दीपिका गुलवानी, स्वास्थ्य कल्याण होम्योपैथी मेडिकल कॉलेज, जयपुर।
- बी.यू.एम.एस. (संयुक्त रूप से) - अनम रूही, राजस्थान यूनानी मेडिकल कॉलेज, जयपुर एवं सुलमान अहमद, राजपूताना यूनानी मेडिकल कॉलेज, जयपुर।
- बी.एससी. आयुर्वेद नर्सिंग - पूनम शर्मा, यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ आयुर्वेद नर्सिंग, जोधपुर।


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