अजमेर ब्यूरो रिपोर्ट।
2 करोड़ की रिश्वत मामले में गिरफ्तार की गई एसओजी की निलंबित एडिशनल एसपी दिव्या मित्तल ने कोर्ट में वॉयस सैम्पल देने से इनकार कर दिया है। एसीबी के प्रार्थना पत्र पर बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि वॉयस सैम्पल के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। ऐसे में कोर्ट ने एसीबी के प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया।बचाव पक्ष के अधिवक्ता प्रीतम सिंह सोनी ने बताया कि 10 फरवरी को एसीजेएम-1 कोर्ट ने एसीबी के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए दिव्या मित्तल को 17 फरवरी को वॉयस सैम्पल देने के आदेश दिए थे। मामले में सुनवाई के दौरान दिव्या मित्तल को कोर्ट में पेश किया। इस दौरान रिकॉल अर्जी लगाई गई। साथ ही प्रार्थना पत्र लगाकर हाईकोर्ट के सिद्धाथों को पेश किया। इसमें बताया कि आरोपी को वॉयस सैम्पल के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। इसके बाद कोर्ट ने दिव्या मित्तल का पक्ष सुना और दिव्या ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि किसी को सैम्पल देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता और वह सैम्पल नहीं देना चाहती। इसके बाद कोर्ट ने एसीबी की अर्जी को खारिज कर दिया। उन्होंने बताया कि दिव्या मित्तल की न्यायिक हिरासत भी पूरी हुई। ज्यूडिशल कस्टडी को लेकर भी कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट के द्वारा न्यायिक हिरासत की अवधि 3 मार्च तक बढ़ा दी गई है। मामले में उनके द्वारा हाईकोर्ट में जमानत याचिका लगाई गई है जिसकी सुनवाई होना बाकी है।

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