जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
पशुपालन मंत्री लालचंद कटारिया ने कहा कि "अफ्रीकन स्वाइन फीवर" अत्यंत संक्रामक तथा अत्यधिक घातक रोग है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को प्रत्येक स्तर पर पशुपालकों को किसी भी प्रकार की हानि एवं परेशानी से बचाने के हर संभव प्रयास करने के निर्देश दिए। कटारिया कृषि पंत भवन में "अफ्रीकन स्वाइन फीवर" रोग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।इस मौके पर उन्होंने मौजूद विभागीय अधिकारीयों से राज्य में अफ्रीकन स्वाइन फ्लू की विस्तृत जानकारी प्राप्त कर रोग के निदान एवं रोकथाम के लिए विस्तार से चर्चा की। उन्होंने अधिकारीयों को निर्देशित करते हुए कहा कि विभाग की समस्त फील्ड संस्थाओं एवं जिला कार्यालयों को इस रोग के प्रति संवेदी बनाया जाये तथा रोग सर्वेक्षण, निदान, रोग प्रकोप की स्थिति में त्वरित कार्यवाही निष्पादित करना सुनिश्चित किया जाए। बैठक में शासन सचिव कृष्ण कुणाल ने संक्रमित एवं सर्वेक्षण क्षेत्र रोग नियंत्रण एवं रोकथाम के लिए विभाग द्वारा की जा रही कार्यवाही पर प्रकाश डालते हुए बताया कि रोग की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए स्थानीय प्रशासन, निकाय प्रशासन तथा पुलिस प्रशासन से समुचित सहयोग लिए जाने के निर्देश प्रदान किये गए है।उल्लेखनीय है कि "अफ्रीकन स्वाईन फीवर" शूकर वंषीय पशुओं में होने वाला संक्रामक, संसर्गजन्य तथा अत्यंत घातक रोग है, जिसकी मृत्यु दर 90 से 100 प्रतिशत है। इस रोग का प्रकोप सर्वप्रथम केन्या में वर्ष 1921 में हुआ, उसके उपरांत यह रोग सब-सहारन अफ्रीका, करेबियन तथा यूरोपीय क्षेत्र सहित कई अन्य देशों में पाया जाता रहा है। वर्ष 2020 के प्रारंभ में यह रोग भारत में सर्वप्रथम उत्तर पूर्वी राज्य असम, अरूणाचल प्रदेश में पाया गया। पूर्व में यह रोग एक्सोटिक रोग के रूप में रहा तथा अब देश के कई भागों में इस रोग के प्रकोप घटित हुये है।
रोग का उपचार।
यह रोग शूकर वंशीय पशुओं में होने वाला अत्यंत घातक रोग है जिसमे पशु की बिना लक्षणों के अथवा लक्षण दिखाई देने के अल्प समय पश्चात् ही मृत्यु हो जाती है। इस रोग के लिये रोग कोई प्रतिरोधक टीका उपलब्ध नहीं है। जैव सुरक्षा उपायों के माध्यम से ही इस रोग से पशुओं को बचाया जा सकता है।