अंगूर को लेकर कितनी ही बातें बनती रहती हैं। यदि इन्हें खरीद करने की क्षमता न हो तो खट्टे, कभी राजा महाराजाओं का भोग तो कभी मधुमेह का पोषक आदि कई बातें अंगूर से जुड़ी हुई है। पश्चिम विश्व में इसे त्वचा के कई प्रकार के कैंसर से रोकथाम में सहायक माना जाता है। ध्यान में रखने की बात है कि बहुत ज्यादा गोरी त्वचा में त्वचा कैंसर ज्यादा होता है। त्वचा का रंग जितना पक्का होगा उसमें कैंसर होने की संभावना उतनी ही कम होगी। गोरे लोगों में कोई न व्यक्ति हर समय किसी न किसी त्वचा कैंसर से मर रहा होता है।

त्वचा के कैंसर होने का सबसे प्रमुख कारण सूर्य की यूवी किरणें है जो त्वचा के भीतर तक जा कर प्रज्वलन करती है और कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती हैं जिसके कारण कई लोगों में कैंसर हो जाता है। अमेरिकन अंगूर उत्पादक संघ द्वारा आंशिक रूप से आर्थिक सहायता प्राप्त परंतु पूर्णतः स्वतंत्र अध्ययन में कुछ बातें सामने आई हैं। पाया गया है कि कई लोगों में अंगूर के सेवन से धूप में त्वचा जलने की घटना में कमी आ जाती है। ऐसा निष्कर्ष निकल कर आया है कि कुछ लोगों में अंगूर के सेवन के फलस्वरूप उनकी त्वचा और आंत के माइक्रो बायोस्फीयर में सकारात्मक परिवर्तन होते हैं जिनसे उनकी त्वचा सूर्य की धूप में कम झुलसती है। त्वचा के माइक्रोबायोटा में 1000 के करीब बैक्टीरिया की प्रजातियां रहती हैं। दिन में  यदि 380 ग्राम लाल, काले या हरे अंगूर को तीन हिस्सों में विभक्त करके सेवन किया जाए तो यू वी सूर्य किरणों से त्वचा का झुलसना काफी कम हो जाता है। ताजा अंगूरों के अलावा सूखे या कूट कर पाउडर बनाए अंगूर भी काम में लिए जा सकते हैं।

ऐसा पाया गया है कि यह रक्षा कवच कुछ प्रतिशत लोगों में विकसित होता है सभी में नहीं। इसका कारण अभी ज्ञात नहीं है पर अंगूर के अन्य लाभ कारक गुणों का फायदा उठाया जा सकता है। लाल अंगूर में खासकर और कुछ मात्रा में काले और हरे अंगूर में रिजर्ववेट्रोल और कई अन्य पॉलीफेनॉल फाइटोकेमिकल पाए जाते है जो हमारे हृदय,  गुर्दे, लीवर और त्वचा के स्वास्थ्य में सहायक हो सकते हैं। इसके अलावा अंगूर फाइबर, पोटेशियम, कुछ विटामिन और मिनरल के भी स्त्रोत होते हैं।

अंगूर का सेवन इन सब पदार्थों की वजह से शरीर में दीर्घकालीन प्रज्वलन ( क्रोनिक इन्फ्लेमेशन ) कम करता है इसलिए हृदय एवम् रक्त संचार तंत्र के रोग, जोड़ों के रोग, कुछ कैंसर को रोकने में सहायक हो सकता है। आंखों की रोशनी के लिए भी सहायक होता है। आंतों एवम् गुर्दे के स्वास्थ्य को बनाए रखने में भी सहायक होता है। चेहरे के मुहांसों को नियंत्रण में रखने के लिए अंगूर का सेवन लाभकारी हो सकता है। यदि कैलोरी को नियंत्रित रखा जाए तो डायबिटीज से पीड़ित लोग भी नियंत्रित मात्रा में अंगूर का सेवन कर सकते है पर इसका रस नहीं लें। किडनी फेल्योर के लोगों को अंगूर से परहेज करना चाहिए क्योंकि इसमें पोटेशियम होता है। इसी तरह, उच्च रक्तचाप के वे पीड़ित लोग जो बीटा ब्लॉकर्स नामक दवा समूह का कोई सॉल्ट उपयोग में लें रहे हों तो उन्हें भी अंगूर कम मात्रा में लेना चाहिए वरना उनके रक्त में पोटैशियम खतरनाक स्तर तक बढ़ सकता है।