चितौड़गढ़-गोपाल चतुर्वेदी।
चित्तौड़गढ़ जिले के पुठोली क्षेत्र में संचालित हो रहे हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड पर राजनीतिक दलों की ओर से किसी न किसी मुद्दे को लेकर हमेशा से दबाव बनाए जाने का प्रयास होता रहा है। जिसमें कभी सीएसआर फंड से विकास कराए जाने का मामला हो या फिर घोसुंडा बांध के निर्माण के समय क्षेत्र की जमीन का मामला हो समय-समय पर यह सभी मामले उठाए जाते रहे हैं। इसी के अंतर्गत शुक्रवार को सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी के कुछ सरपंच और कार्यकर्ताओं की ओर से हिंदुस्तान जिंक द्वारा वादाखिलाफी किए जाने के संबंध में एक ज्ञापन जिला कलेक्टर को सौंपा गया।जानकारी में सामने आया है की इस पूरी ज्ञापन देने की प्रक्रिया में शामिल लोगों का मकसद निजी व्यवसायिक हित साधने के लिए हिंदुस्तान जिंक प्रशासन को दबाव में लेना अधिक दिखाई दे रहा है। जानकारी के अनुसार एक राजनैतिक दल के कुछ सरपंच और पदाधिकारी जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे जहां पर उन्होंने हिंदुस्तान जिंक वेदांता पर वादाखिलाफी किए जाने का आरोप लगाते हुए जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। जिसमें कहा गया है कि हिंदुस्तान जिंक वेदांता द्वारा सीएसआर मद से कराए जाने वाले कार्यों में भेदभाव किया जा रहा है। जिसके पहले वेदांता प्रबंधन की ओर से लिखित में सहमति और स्वीकृति इस पर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गई। चित्तौड़गढ़ विधानसभा क्षेत्र में हिंदुस्तान जिंक द्वारा सीएसआर मद से करवाए विकास कार्यों में भेदभाव किया जा रहा है। जिसके चलते स्थानीय लोगों में रोष व्याप्त है। जानकारी में सामने आया है कि हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड पर लगातार राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं की ओर से अपने व्यवसायिक हित साधने के लिए किसी न किसी तरह से दबाव बनाया जाता है। जिसमें पहले व्यक्तिगत रूप से जिंक प्रबंधन से बात की जाती है उसके पश्चात राजनीतिक दल का उपयोग करते हुए कुछ लोगों को इकट्ठा करके ज्ञापन के माध्यम से जिंक प्रशासन पर दबाव बनाने का प्रयास किया जाता है। उसके बाद इसमें जो अव्वल दर्जे के नेता होते हैं उन्हें पीछे के रास्ते से फायदा मिल जाता है और अन्य जो सहयोगी होते हैं उन्हें अंधेरे और मुगालते में रखा जाता है। शायद यही वर्तमान समय का सच है जिसमें यही कहावत चरितार्थ होती है लाठी उसकी भैंस।

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