जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच विवाद समाप्त नहीं होने का नाम ले रहा है। केंद्रीय नेतृत्व इस समस्या के समाधान की ओर ध्यान नहीं देने से यह विवाद अब कम होने की जगह बढ़ने लगा है। सचिन पायलट ने परिस्थितियों को देखते हुए अब नए समीकरण पर काम शुरू कर दिया है। पंजाब के प्रभारी और विधायक हरीश चौधरी के बीच एक नया समीकरण उभर कर सामने आने की स्थिति बनी रही हैं। 25 जनवरी को पायलट के बंगले पर हरीश चौधरी से लंबी बातचीत हुई है। दोनों के बीच क्या कुछ बातचीत हुई है इसका मसौदा तो बाहर नहीं आ पाया है । लेकिन यह बात सही है कि आने वाले समय में अगर दोनों नेताओं के बीच राजनीति को लेकर कोई समझौता होता है तो निश्चित तौर पर सचिन पायलट को पश्चिमी राजस्थान में अपना राजनीतिक वर्चस्व बनाने में सहायता मिलेगी। हरीश चौधरी पहले सीएम के साथ थे, लेकिन कुछ मुद्दों पर पिछले कई महीनों से उनके रिश्तों में खटास आई है। हरीश चौधरी ओबीसी आरक्षण सहित कई मामलों को लेकर सीएम गहलोत के खिलाफ बयान बाजी कर चुके हैं। अब नाराजगी का स्तर काफी बढ़ चुका है। नई परिस्थितियों के चलते ही हरीश चौधरी अब सचिन पायलट के साथ राजनीति करने की रणनीति तैयार कर रहे हैं। जिससे कि उन्हें राजनीति में एक नया मुकाम प्राप्त हो सके। सचिन पायलट शीघ्र बाड़मेर-जैसलमेर और जोधपुर जिलों में किसान सम्मेलन करने की तैयारी कर रहे हैं। इन किसान सम्मेलनों में पायलट काे हरीश चौधरी सक्रिय होकर इन किसान सम्मेलन में पायलट का समर्थन कर सकते हैं। वन मंत्री हेमाराम चौधरी ने अपनी उम्र 75 वर्ष हो जाने के बाद यह ऐलान कर दिया है कि वह राजनीति से संन्यास ले लेंगे । ऐसे में हरीश चौधरी ने इसका फायदा उठाते हुए सचिन पायलट के साथ रणनीति नहीं बनाने का फैसला किया है । जिससे कि आने वाले समय में उनका राजनीतिक वजूद बढ़ सके। यही कारण है कि हेमाराम चौधरी के साथ अब हरीश चौधरी भी साथ-साथ राजनीतिक यात्रा कर रहे हैं। चुनावी साल में सचिन पायलट अपने समर्थक नेताओं की संख्या बढ़ाने की कोशिश में लग गए हैं। फिलहाल नए राजनीतिक समीकरण को लेकर कुछ कहना ठीक नहीं है। आने वाला समय ही इस बात का जवाब देगा कि पायलट और हरीश चौधरी के बीच जो नया समीकरण बना है वे राजनीति में क्या कुछ कर सकता है।

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