जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
पिंकसिटी प्रेस एनक्लेव, नायला जेडीए की वर्ष 2010 की अप्रूव्ड और सुनियोजित योजना है, जिसमें वर्ष 2013 में राज्य स्तरीय समिति से चयनित 571 पत्रकारों को लॉटरी निकालकर प्लॉट आवंटित किए जा चुके हैं। तो आवंटियों को प्लॉटों के पट्टे क्यों नहीं दिए जा रहे। चलो नायला संगठन के आह्वान पर मुख्यमंत्री निवास पर पहुंचकर आवंटन दस्तावेज जमा कराने का क्रम 19वे दिन शुक्रवार को भी जारी रहा। शुक्रवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मिलने पहुंचे 16वे जत्थे में वरिष्ठ पत्रकार महेश मिश्रा, सुधीर कुमार शर्मा, दुर्गा लाल यादव, अभिषेक सिंह और अजय शर्मा ने मुख्यमंत्री निवास पर मुख्यमंत्री के नाम संयुक्त सचिव ललित कुमार को ज्ञापन सौंपा। ललित कुमार ने पत्रकारों से कहा कि मुख्यमंत्री को प्रकरण ध्यान में है। इस पर पत्रकारों ने कहा कि सभी 571 आवंटियों ने जेडीए में भी पट्टे देने की गुहार की है, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं दिया जा रहा है। जेडीए अधिकारी कहते हैं कि योजना की तथ्यात्मक रिपोर्ट सरकार को भेज दी है। पट्टे देने का निर्णय सरकार ही करेगी। जब आवंटी पत्रकारों की पात्रता की जांच राज्य स्तरीय पत्रकार आवास समिति ने राजस्थान अधिस्वीकरण नियम 1995 के अनुसार की थी। राज्य के नगरीय विकास विभाग के प्रदेश भर में जारी सर्कुलर में निर्धारित सभी पात्रताएं भी सबने पूरी की था। पात्रता में सफल होने पर ही 571 पत्रकारों को लॉटरी निकालकर प्लॉट आवंटित हुए थे तो अब पात्रता पर सवाल क्यों खड़ा किया जा रहा है। जबकि इस मामले में हाई कोर्ट ने भी 3 जुलाई 2013 के निर्णय में योग्य और पात्र आवंटियों को 15 दिन में जांच कर कब्जा देने को कहा है। 15 दिन में कार्यवाही नहीं होने पर 16 सितंबर 2013 के निर्णय में हाई कोर्ट ने नाराजगी भी जताई है। इसके बावजूद 10 साल होने को आए, लेकिन आवंटियों को प्लॉट का कब्जा नहीं दिया जा रहा है। आवंटियों के साथ हो रहे अन्याय पर मुख्यमंत्री को ही निर्णय करना है। मुख्यमंत्री से मिलने तक आवंटियों के जत्थे सीएमआर आते रहेंगे।

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