जोधपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
सीआरपीएफ रीजनल ट्रेनिंग सेंटर में सोमवार सुबह अपनी बंदूक से गोली मारकर जान देने वाले कॉन्स्टेबल नरेश जाट के शव का 24 घंटे गुजर जाने के बाद भी अभी तक अंतिम संस्कार नहीं किया गया है। परिजनों ने अपनी मांगें पुलिस और सीआरपीएफ के सामने रख दी है। मांगों पर सहमति के बाद ही शव लेने की बात की जा रही है। जबकि शव का पोस्टमार्टम हो गया था और सीआरपीएफ को देने के लिए दस्तावेज भी तैयार हो गए थे। सीआरपीएफ शव प्राप्त कर परिजनों को सुपुर्द करने वाली थी लेकिन परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया। इस बात को लेकर सोमवार रात 11:00 बजे तक गतिरोध चलता रहा। उसके बाद डीआईजी भूपेंद्र सिंह ने संदेश भेजकर वार्ता करने की बात कही लेकिन परिजनों ने उनसे बात करने से मना कर दिया। जिसके बाद आईजी विक्रम सहगल का भी प्रस्ताव आया लेकिन फिर परिजनों ने कह दिया कि सुबह बात करेंगे। अब इस मामले में कुछ देर बाद वार्ता शुरू हो सकती है। परिजनों ने सीआरपीएफ के कुछ अधिकारी व कर्मचारियों के नाम के साथ रिपोर्ट कड़वड़ थाना पुलिस को सौंपी है। जिस पर मामला दर्ज हो गया है। इस बीच राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल के भी इस मामले को लेकर जोधपुर पहुंचने की बात सामने आ रही है, जिसके चलते पुलिस प्रशासन सतर्क है। दूसरी ओर पाली व आसपास के गांव से भी लोगों को जोधपुर पहुंचने के संदेश दिए गए हैं। बता दे, कि सीआरपीएफ जवान नरेश जाट ने रविवार शाम को खुद को परिवार सहित अपने क्वार्टर में बंदी बना कर रखा था। कई हवाई फायर भी किए थे। इसके बाद समझाइश भी काफी देर तक चली, लेकिन अंततः सोमवार सुबह करीब 11:30 बजे उसने खुद को गोली मार ली। इस घटना के बाद उसके पिता लिखमाराम ने कहा था कि जब तक कार्रवाई नहीं हो जाती हम शव नहीं उठाएंगे। परिजनों की मांग है कि जिन अफसरों ने उसे टॉर्चर किया उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। इसके अलावा उसकी पत्नी को नौकरी और बेटी की आजीवन शिक्षा की व्यवस्था हो साथ ही उसके गांव में नरेश जाट की अंत्येष्टि से पहले उसे गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाए।