जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के लिए कांग्रेस के राज्यसभा के तीनों उम्मीदवारों का जीताना चुनौतीपूर्ण कार्य हो गया है । राज्यसभा चुनावों में भाजपा समर्थक निर्दलीय उम्मीदवार सुभाष चंद्रा के मैदान में उतरने से कांग्रेसी गुट की चिंताएं बढ़ गई हैं। कांग्रेस को अब बदले हुए हालात में क्रॉस वोटिंग का डर सता रहा है। कुछ कांग्रेस और समर्थक विधायकों की नाराजगी के बाद समीकरण बिगड़ते दिख रहे हैं। तीसरे उम्मीदवार की जीत पर खतरा पैदा हो गया है।कांग्रेस और समर्थक विधायकों को एकजुट रखने के लिए 3 जून से उदयपुर में बाड़ेबंदी की तैयारी की जा रही है। जिस होटल में कांग्रेस का चिंतन शिविर हुआ था, वहीं विधायकों की बाड़ेबंदी की जाने की रणनीति तैयार की जा रही है। बुधवार और गुरुवार को होटल क्लार्क्स आमेर में कांग्रेस का चिंतन शिविर के फैसलों को लागू करने के लिए विधायकों और प्रमुख नेताओं का शिविर आयोजित कर रखा है। शिविर खत्म होने के साथ ही 3 जून से विधायकों और समर्थित विधायकों की बाड़े बंदी कर दी जाएगी। कांग्रेस समर्थक निर्दलीय विधायकों की सीएम निवास पर हुई बैठक में तीन विधायक नहीं पहुंचे। सीएमआर पर हुई बैठक में निर्दलीय रमिला खड़िया, खुशवीर जोजावर और ओप्रकाश हुड़ला नहीं पहुंचे थे। इसके अलावा कई कांग्रेस विधायकों की नाराजगी भी चुनौती है। बीटीपी के दो विधायक भी सरकार से नाराज हैं और आदिवासी को उम्मीदवार बनाने पर ही समर्थन देने की शर्त रखी थी। कांग्रेस के तीन उम्मीदवार मुकुल वासनिक, रणदीप सुरजेवाला और प्रमोद तिवारी मैदान में हैं। हर उम्मीदवार को जीत के लिए 41-41 विधायकों के वोट चाहिए। तीनों उम्मीदवारों के लिए 123 विधायकों के वोट जरूरी हैं। बदले हालात में अगर तीन विधायकों के वोट भी इधर उधर हो गए तो कांग्रेस के तीसरे उम्मीदवार की हार हो सकती है। कांग्रेस के पास खुद के 108 विधायक हैं। एक आरएलडी के सुभाष गर्ग हैं। 13 निर्दलीय, दो सीपीएम और दो बीटीपी विधायकों को मिलाकर कांग्रेस 126 विधायकों के समर्थन का दावा है। चार निर्दलीय, दो बीटीपी विधायक कांग्रेसी खेमे से खिसके तो संख्या बल 120 ही रह जाएगा। राज्यसभा चुनावों में 10 जून को मतदान है। कांग्रेस रणनीति के तहत दो उम्मीदवारों को पहले  सुरक्षित करते हुए 41-41 वोट डलवाएगी ताकि उनकी जीत सुनिश्चित हो सके। तीसरी वरीयता नंबर पर जो उम्मीदवार रहेगा, उस पर खतरा रहेगा।