नागौर ब्यूरो रिपोर्ट।
नागौर के नावां कांग्रेस विधायक और सरकारी उप सचेतक महेंद्र चौधरी के भाई मोती सिंह चौधरी ने ही बाहर से शूटर बुला नमक कारोबारी और भाजपा नेता जयपाल पूनिया की हत्या करवाई थी। इस हत्याकांड की पहले से ही योजना तैयार कर ली गई थी। इसके बाद मोती सिंह ने अपने 11 साथियों के साथ मिलकर कारोबारी जयपाल पुनिया की रैकी भी की। फायरिंग के बाद जब पूनिया को जयपुर रेफर किया, तो भी मोती सिंह ने उसका पीछा किया था। वह जानना चाह रहा था कि जयपाल जिंदा है या फिर मर गया। पुलिस जांच में इन बातों के सामने आने के बाद मंगलवार देर रात नावां विधायक महेंद्र चौधरी के भाई मोती सिंह चौधरी सहित 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। वहीं वारदात में शामिल 6 आरोपी अभी फरार हैं। जिनकी तलाश की जा रही है। पकड़ा गया एक अन्य आरोपी भी विधायक महेंद्र चौधरी का रिश्तेदार है। पुलिस जांच में हत्या के मामले में नावां कांग्रेस विधायक और सरकारी उप सचेतक महेंद्र चौधरी के भाई मोती सिंह चौधरी का लिंक आते ही उसे दूसरे दिन ही हिरासत में ले लिया था। इसके बाद मंगलवार देर रात जयपुर से पहले आंदोलन कर रहे लोगों और सरकार के बीच सहमति बनने के बाद पुलिस ने सरकारी उप सचेतक महेंद्र चौधरी के भाई मोती सिंह चौधरी निवासी नावां, कुलदीप सिंह निवासी पवेरा तहसील नांगल चौधरी हरियाणा, फिरोज कायमखानी निवासी नावां, हनुमान माली निवासी मथानिया और हारून कायमखानी निवासी नावां को गिरफ्तार किया है। कुचामन सीओ संजीव कटेवा ने बताया कि नमक कारोबारी और भाजपा नेता जयपाल पूनिया का मर्डर मोती सिंह ने शूटर बुलाकर करवाया था। फिलहाल पकडे गए सभी पांचों आरोपी मर्डर की प्लानिंग और रेकी में शामिल थे। अभी 6 आरोपी फरार है। जयपाल पूनिया हत्याकांड की जड़ में दोनों के बीच रुपयों का लेनदेन और नावां की नमक झील के क्षेत्र में वर्चस्व और अकूत अवैध कमाई है। आरोपी मोती सिंह और जयपाल पूनिया के बीच वर्चस्व की ये लड़ाई लम्बे समय से चली आ रही थी। यहां की सरकारी जमीनों और सांभर साल्ट कंपनी की जमीन में बोरिंग और कब्जे को लेकर दोनों पक्षों के बीच कई बार विवाद हो चुके थे। लेनदेन को लेकर भी कई मुकदमे दर्ज हुए थे।

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