गणगौर के पर्व के मौके पर जयपुर सहित पूरे राजस्थान में दो साल बाद सवारी निकली है। देसी-विदेशी पर्यटकों को इस फेवरेट फेस्टिवल का क्रेज देखते ही बना। जयपर, जोधपुर, उदयपुर, सवाईमाधोपुर सहित कई जिलों में पारंपरिक पर यह उत्सव मनाया गया है। कोरोना के कारण दो साल से गणगौर की सवारी नहीं निकली थी। जयपुर में पूर्व राजपरिवार की सदस्य प्रिंसेस गौरवी कुमारी ने सिटी पैलेस में गणगौर की पूजा की। वहीं, जोधपुर में 2 करोड़ के गहनों से सजी गणगौर निकाली गई।कोरोना काल में लगे 2 साल के ब्रेक के बाद इस साल फिर उसी शान से गणगौर की सवारी निकाली गई। पिछले दो साल गणगौर की सवारी सिर्फ सिटी पैलेस में घूमकर रावले में माता विराजी। जो शहर में नहीं आई थी। 2 साल बाद निकल रही सवारी को देखने के लिए एक बार फिर देसी-विदेशी पर्यटकों का जमावड़ा लगा। इस सवारी में गणगौर माता विशेष रूप से सजाए गए ऊंट, घोड़े, बैलगाड़ी और शाही हाथी के लवाजमे के साथ त्रिपोलिया गेट से निकलीं।



उदयपुर में मेवाड़ फेस्टिवल का आगाज
उदयपुर का प्रसिद्ध मेवाड़ फेस्टिवल दो साल के इंतजार के बाद आखिरकार सोमवार से शुरू हो गया। इसे गणगौर फेस्टिवल भी कहा जाता है। कोरोना के चलते 2020 और 2021 में यह फेस्टिवल नहीं हो सका था। आमतौर पर अप्रैल के महीने में होने वाले इस फेस्टिवल के दौरान दो साल से कोरोना हावी था। ऐसे में 2019 के बाद अब इस साल यह फेस्टिवल मनाया जा रहा है।

गणगौर एक ऐसा पर्व है, जो हर महिला मनाती है। इसमें कुंवारी कन्या से लेकर, शादीशुदा महिला भगवान शिव और माता पार्वती की पूजन करती हैं। ऐसा माना जाता है कि शादी के बाद पहला गणगौर पूजन मायके में किया जाता है।



जोधपुर में दो करोड़ के गहने पहने गणगौर की सवारी
जोधपुर में बैंड की धुन के साथ भीतरी शहर में गणगौर की सवारी निकली। परकोटे के अंदर राखी हाउस से निकली सवारी के लोगों ने दर्शन किए। इस गणगौर की प्रतिमा को साढ़े तीन किलो सोने से सजाया गया। करीब दो करोड़ का सोना पहने यह गणगौर भीतरी शहर की तंग गलियों से होती हुई जालोरी गेट चौराहे पहुंची। वहां से वापस परकोटे के अंदर होती हुई बालवाडी स्कूल, खांडा फलसा आडा बाजार होते हुए घंटाघर पर पूजा अर्चना के साथ विसर्जित होती है।



सवाई माधोपुर में शाही ठाठ-बाट के साथ निकली गणगौर की सवारी
सवाई माधोपुर में चौथ का बरवाड़ा कस्बे स्थित होटल सिक्स सेंसेस बरवाड़ा फोर्ट में शाही ठाठ-बाट के साथ गणगौर की सवारी निकाली गई। इस दौरान पंचायत जनप्रतिनिधियों और ग्रामीण लोगों ने गणगौर की पूजा की, जिसके बाद गणगौर की भव्य सवारी निकाली गई।



राजसमंद में कांकरोली की चुंदड़ी गणगौर सवारी
राजसमंद नगर परिषद की ओर से 5 दिन का गणगौर महोत्सव मनाया जा रहा है। तीसरे दिन सोमवार को कांकरोली में चुंदड़ी गणगौर की परम्परागत सवारी ठाठ-बाट से निकली। जयपुर के बाद प्रदेश की यह सबसे भव्य सवारी होती है।