श्रीगंगानगर से राकेश मितवा
साहित्य अकादेमी के राजस्थानी परामर्श मंडल संयोजक एवं वरिष्ठ साहित्यकार मधु आचार्य ‘आशावादी’ ने कहा है कि युवाओं को वर्तमान में जीने की आदत डालनी चाहिए लेकिन नजर सदैव भविष्य पर रहनी चाहिए। अगर आप भविष्य को ध्यान में रखकर काम करेंगे तो निश्चय ही अपनी मंजिल को प्राप्त करेंगे।
वे रविवार को साहित्य अकादेमी एवं सृजन सेवा संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राजस्थानी युवा लेखक सम्मेलन  के समापन समारोह का समाहार करते हुए बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि भविष्य में युवाओं को अपनी भाषा के साथ जुडक़र रहना पड़ेगा। अपनी मातृभाषा में ही भविष्य सुरक्षित रह पाएगा। इसलिए युवाओंं को अपनी भाषा, संस्कृति, साहित्य एवं संस्कारों के साथ चलना पड़ेगा।
समापन सत्र की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. कृष्णकुमार आशु ने कहा कि पंजाबी संस्कृति से प्रभावित इस सीमांत अंचल में प्रदेश भर से युवा राजस्थानी साहित्यकारों का आना महत्व रखता है। उनकी रचनाओं को सुनकर महसूस होता है कि आज राजस्थानी साहित्य बहुत आगे निकल चुका है और विश्व के किसी भी साहित्य से कमतर नहीं है। समापन सत्र का संचालन युवा कवयित्री मीनाक्षी आहुजा ने किया।
इससे पहले, सम्मेलन के दूसरे दिन कार्यक्रम की शुरुआज कहानी पाठ के सत्र से हुई। इसमें दुष्यंत जोशी (हनुमानगढ़) ने अपनी राजस्थानी कहानी  ‘झूंपड़ाळो बास’ और अरविंद विश्वेंद्रा (सुजानगढ़) ने अपनी कहानी ‘डाकियो’ सुनाई।
इस सत्र की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ आलोचक भूपेंद्रसिंह ने कहा कि कहानी उतनी ही पुरानी है, जितनी मनुष्य जाति। एक-दूसरे को अपनी बात कहने की परम्परा से कहानी का जन्म हुआ है। उन्होंने कहा कि कहानी की अपनी एक सबल परम्परा रही है और समय के साथ इसमें निरंतर बदलाव आए हैं। भूपेंद्रसिंह ने दोनों कहानीकारों को अच्छी कहानियों के सृजन के लिए बधाई दी। इस सत्र का संचालन किरण बादल ने किया।
इसके बाद हुए कविता पाठ के सत्र में प्रहलादसिंह झोरड़ा (नागौर), देवीलाल महिया (पाली), डिम्पल राठौड़ (चूरू) एवं राजू गोस्वामी (श्रीगंगानगर) ने अपनी कविताओं का वाचन करके प्रभाव जमाया।  इस सत्र की अध्यक्षता करते हुए युवा कवि मोहन पुरी (भीलवाड़ा) ने माना कि राजस्थानी कविता का भविष्य उज्ज्वल है। उन्होंने कहा कि कविता के  साथ साहित्य की अन्य विधाओं में भी काम करने की आवश्यकता है। इस सत्र का संचालन युवा कवि सत्यपाल जोइया ने किया।
सृजन सेवा संस्थान के अध्यक्ष डॉ. अरुण शहैरिया ‘ताईर’ ने आभार जताया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्यकार एवं साहित्य प्रेमी उपस्थित थे।