कोटा-हंसपाल यादव।
कोटा के नए अस्पताल में बिजली गुल होने की वजह से रविवार रात एक महिला की मौत हो गई। मंगलवार को मृतका नंदू की बेटी मधु ने न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल पर लापरवाही के आरोप लगाए। मधु मौर्य ने बताया कि अस्पताल मैनेजमेंट 4 घंटे तक लाइट की कोई व्यवस्था नहीं कर पाया। खराब मैनेजमेंट ने मां की उसके सामने जान ले ली। रविवार रात करीब 8 बजे अचानक फॉल्ट आने से लाइट चली गई। मरीज गर्मी से छटपटाने लगे। इस दौरान हाथ के जरिए अम्बू बैग से मां को ऑक्सीजन दी। उसका भाई और वो 4 घंटे तक अम्बू बैग दबाते रहे। उसकी मां तड़प रही थी। रात 10 बजकर 25 मिनट पर उसकी मां ने दम तोड़ दिया था। इसके बाद स्टाफ सीपीआर देते रहे।
शुगर लेवल डाउन होने पर लेकर आए थे अस्पताल।
मधु मौर्य ने कहा कि उसकी मां को शुगर की बीमारी थी। शुगर लेवल डाउन होने पर रविवार को सुबह 11 बजे रावतभाटा से कोटा न्यू मेडिकल हॉस्पिटल में भर्ती करवाया था। उनकी सीटी स्कैन, ईसीजी, एक्सरे समेत ब्लड टेस्ट करवाए। दिन में शुगर लेवल 40 से 50 पहुंच गया था। दोपहर तीन बजे के आसपास मां को वेंटिलेटर पर लिया गया। एक चश्मे वाले डॉक्टर अच्छे थे। उन्होंने कहा था लिक्विड देते रहें। सुबह तक वेंटिलेटर हट जाएगा। उनकी शाम 7 बजे ड्यूटी खत्म हो गई थी। अचानक शाम 7.15 पर लाइट बंद होने के बाद स्टाफ ने अम्बू बैग दिया।
स्टाफ की लापरवाही भी आई सामने।
मृतक की बेटी ने कहा स्टाफ को शुगर चेक करने को कहा तो स्टाफ ने शुगर स्ट्रीप होने से इनकार कर दिया। मां के हाथ-पैर ठंडे होने लगे। स्टाफ ने एक नहीं सुनी। हॉस्पिटल में उसके पापा, भाई मामा समेत 10 लोग थे। सभी लाइट जाने के बाद अम्बू बैग से मां को ऑक्सीजन देते रहे। हाथ के पंखे से हवा करते रहे। मां के हाथ-पैर ठंडे होने लगे। स्टाफ ने एक नहीं सुनी। आखिर में 10 बजकर 25 मिनट पर मां की सांसों ने साथ छोड़ दिया। वो अंधेरे में सीपीआर देते रहे। इस दौरान पुलिस को बुलाया गया और हमें अंधेरे में ही छुट्टी दे दी।
इनका कहना है।
इधर हॉस्पिटल अधीक्षक डॉ. सीएस सुशील ने बताया कि बिजली सप्लाई बाधित होने से हॉस्पिटल में भर्ती किसी भी रोगी की जान-माल की कोई हानि नहीं हुई है। मीडिया में जिसे बिजली बाधित होने के कारण डेथ बताई गई है, वह सरासर गलत है। वो मरीज गंभीर थी और वेंटीलेटर पर थी। वेंटीलेटर, बैकअप से चल रहा था। अम्बू बैग से भी सपोर्ट दिया गया था।

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