जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
राजस्थान में पिछले कई दिनों से चल रही अघोषित बिजली कटौती के बाद अब घोषित तौर पर बिजली कटौती शुरू हो गई है। भाजपा ने प्रदेश की गहलोत सरकार पर बिजली मिस-मैनेजमेंट के आरोप लगाए है।भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया ने कहा है कि बिजली कटौती के कारण परीक्षा की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स और आम जनता परेशान है। भाजपा पूरे राज्य में इस कटौती के विरोध में 29 अप्रैल को सुबह 9 से 11 बजे तक हर ग्रिड सब-स्टेशन पर धरना-प्रदर्शन करेगी। भाजपा विधायक दल के उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने कहा कि प्रदेश में आज तापमान बढ़ता जा रहा है,बिजली गुल हो रही है। मैंने विधानसभा में भी कहा था। अब सवाल यह है कि राजस्थान के खुदके 8 थर्मल पावर प्लांट से करीब 4444 मेगावाट बिजली पैदा होती है। तकनीकि कारणों से उन्हें बंद करने का काम सरकार कर रही है। ताकि महंगी बिजली खरीदकर चांदी कूटने का काम सरकार को मिले। प्रदेश में बिजली की डिमांड 35 फीसदी तक बढ़ चुकी है। रोजाना 4 करोड़ 80 लाख यूनिट की कमी पड़ रही है। डिमांड और उपलब्धता में गैप के कारण सरकार ने पूरे प्रदेश में बिजली कटौती का फैसला लिया गया है। आपको बता दें कि ऊर्जा मंत्री भंवर सिंह भाटी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई बैठक के बाद सम्भाग मुख्यालयों पर 1 घंटे, जिला मुख्यालयों पर 2 घंटे बिजली कटौती शुरू हो गई है। जयपुर में सुबह 7 से 8 बजे तक और बाकी संभाग मुख्यालयों पर सुबह 8 से 9 बजे तक पावर कट है। जबकि नगरपालिका क्षेत्रों और कस्बों में 3 घंटे कटौती की जा रही है। कस्बों में सुबह 6 से 9 बजे तक बिजली कटौती करने के आदेश हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में लोकल शेड्यूल के हिसाब से कटौती की जा रही है। इंडस्ट्रियल कनेक्शन को शाम 6 से रात 10 बजे तक लोड कैपेसिटी की 50 फीसदी बिजली दी जा रही है। किसानों को सुबह की बजाय रात में बिजली देने का फैसला लिया है। उसमें भी 1 घंटे की कटौती कर दी गई है। इस कटौती से बड़ी आबादी परेशान हो रही है।

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