जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट। 

राज्य वित्त पोषित विश्वविद्यालयों के कुलपति व्यक्तिगत रूप से 5 हजार रुपए से ज्यादा का डोनेशन (उपहार) स्वीकार नहीं करेंगे और इससे ज्यादा का डोनेशन आए ताे प्रशासनिक विभाग काे सूचित करेंगे। ये निर्देश राज्यपाल की अध्यक्षता में पिछले दिनाें हुई टास्क फाेर्स की बैठक में प्रदेश के विश्वविद्यालयों के कुलपतियों काे दिए गए।

शुक्रवार काे राजभवन ने बैठक के मिनट्स जारी कि। ये सभी कुलपतियों काे भी भेजे गए हैं। इस बैठक में सभी विश्वविद्यालयों में एमएड, विशेष शिक्षा, बीएड शुरू करने, ई-लाइब्रेरी की व्यवस्था में सुधार, नई शिक्षा नीति के अनुसार काेर्स, रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण, गुणात्मक सुधार जैसे विषयों पर चर्चा हुई थी।

सरकारी काॅलेजाें के प्रिंसिपल पर भी काेड ऑफ कंडक्ट लागू हाे
इसके अलावा निर्देश दिए गए कि काॅलेज शिक्षा विभाग द्वारा काॅलेजाें में पढ़ रहे छात्रों के लिए ई-कंसोर्टियम लिया जाए। विश्वविद्यालयों में ई-कंसोर्टियम लागू किए जाने के लिए देश के जिस विश्वविद्यालय द्वारा इस सेक्टर में अच्छा काम किया है, उसकाे आइडेंटिफाई कर एक टीम जाए और उसका अध्ययन कर इसे राज्य में लागू करने के लिए प्रस्ताव तैयार करें।

राज्य वित्त पोषित विश्वविद्यालयों के स्किल/एक्सीलेंस एरिया से संबंधित ट्रेनिंग अन्य विश्वविद्यालयों काे भी दी जाए। विवि स्किल मैपिंग करे। उनके आसपास 100 किमी रेडियस में इंडस्ट्रीज काे क्या रिक्वायरमेंट है, इसका विश्लेषण करके छात्रों काे तैयार करे। प्रदेश के सरकारी काॅलेजाें में पदस्थापित प्रिंसिपल पर भी काेड ऑफ कंडक्ट लागू किया जाना चाहिए।

लाेकल डिमांड के हिसाब से हाे काेर्स
राज्यपाल सलाहकार बाेर्ड के सदस्य ने सुझाव दिया कि विश्वविद्यालयों में संचालित स्किल ओरिएंटेड काेर्स लाेकल इंडस्ट्रीज की रिक्वायरमेंट के हिसाब से संचालित नहीं है। इसलिए ये काेर्स विश्वविद्यालय की भौगोलिक परिस्थितियों और लाेकल जरूरत के हिसाब से तय किए जाएं तथा विश्वविद्यालयों काे स्टूडेंट्स की रोजगार क्षमता बढ़ाने पर फाेकस करना चाहिए। काेर्स समय-समय पर अपडेट हाे। विश्वविद्यालयों में एसयूएमएस लागू करते हुए खुद के सर्वर पर पूरा डाटा सुरक्षित किया जाए। ई-रिसोर्स जनरेट करें।