जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
राजस्थान फार्मेसी काउंसिल में दूसरे राज्यों से फर्जी डिग्री पर 46 विद्यार्थियों द्वारा रजिस्ट्रेशन कराने का मामला सामने आया है। ऐसे में फार्मेसी काउंसिल ने दस्तावेजों के गड़बड़ी का अंदेशा जताते हुए संबंधित शिक्षण संस्थाओं से डिग्री की जानकारी मांगी तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच में एमपी, यूपी, पंजाब, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के विद्यार्थियों की सबसे अधिक डिग्री फर्जी पाई गई। फार्मेसी काउंसिल ने गोपनीय जांच के आधार पर फर्जी पाए जाने पर अभ्यार्थियों के न केवल आवेदनों को खारिज किया है बल्कि उन्हें संबंधित बोर्ड और विश्वविद्यालय को कार्रवाई के लिए भी लिखा है।आपको बता दें, कि राजस्थान में फार्मासिस्ट के 2020 पदों पर भर्ती निकलने वाली है। ऐसे में सरकारी नौकरी के लिए बोर्ड की फर्जी अंकतालिका और डिप्लोमा इन फार्मेसी की फर्जी डिग्री से रजिस्ट्रेशन कराकर आवेदन करने की तैयारी की गई थी। फार्मेसी काउंसिल में एक विद्यार्थी ने डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम यूनिवर्सिटी इंदौर से डिप्लोमा इन फार्मेसी के दस्तावेज लगाकर आवेदन किया था। यूनिवर्सिटी ने जांच के दौरान संस्थान का स्टूडेंट नहीं होने की सूचना काउंसिल को दी गई। साथ ही रजिस्ट्रेशन नहीं करने के लिए कहा है।मध्यप्रदेश राज्य मुक्त स्कूल शिक्षा बोर्ड भोपाल से एक विद्यार्थी ने 12 वीं की अंकतालिका लगाकर आवेदन किया था। वेरिफिकेशन के लिए भेजने पर बोर्ड ने विद्यार्थी की मार्कशीट को असत्य, फर्जी और कूटरचित बताया और नियमानुसार कार्रवाई करने के लिए कहा है। राजस्थान फार्मेसी काउंसिल अध्यक्ष डॉ.ईश मुंजाल ने बताया कि सारे दस्तावेजों की जांच के बाद ही प्रवेश देना चाहिए। बाहरी राज्यों में पहले तो प्रवेश फिर फर्जी डिग्री से पंजीकरण के लिए दबाव बनाते हैं। जबकि देरी का प्रमुख कारण काउंसिल में दस्तावेजों की जांच-परख के बाद ही पंजीकरण किया जाता है। जिनकी डिग्री फर्जी है, उनके खिलाफ कार्रवाई को लिखा गया है। राजस्थान फार्मेसी काउंसिल रजिस्ट्रार नवीन सांघी ने बताया कि नवंबर से मार्च तक पंजीकरण के लिए करीबन 3200 आवेदन मिले है। जिसमें से हर तरह से सही पाए जाने पर 2500 का ही रजिस्ट्रेशन किया है। हर कदम पर एहतियात बरती जा रही है।

0 टिप्पणियाँ