करौली ब्यूरो रिपोर्ट।
करौली शहर में नवल बिहारी मंदिर, विवेक विहार कॉलोनी, सर्किट हाउस, गोमती कॉलोनी सहित विभिन्न प्रसिद्ध मंदिरों में शुक्रवार को महिलाओं ने शीतला माता की पूजा कर बासोड़ा यानी की बासे पकवानों का भोग लगाया गया।

शीतला माता को लगाया बासे पकवानों का भोग।
शीतला अष्टमी व्रत में शीतला माता को पूजा के दौरान बासी पकवानों के भोग लगाए जाते हैं। क्योंकि शीतला माता को ठंडे और बासी पकवान ही प्रिय होती है। शीतला माता को भोग लगाने के लिए पकवान सप्तमी के दिन बनाकर रख लिए जाते हैं। ताकि अगले दिन भोग लगाया जा सके। शीतला अष्टमी व्रत के दिन सुबह में चूल्हा नहीं जलाते हैं। शीतला माता के भोग के लिए पुआ, पुड़ी, हलवा, गन्ने के रस और चावल से बनी खीर या गुड़ वाली खीर बनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शीतला अष्टमी व्रत रखने और बासी भोग को ग्रहण करने से ज्वर, चर्म रोग, शीतला जनित रोग-कष्ट आदि से मुक्ति मिलती है। जिन पकवानों का भोग लगाते हैं, उनको ही परिवार के सदस्य प्रसाद स्वरुप ग्रहण करते हैं। इस दिन प्रसाद के साथ नीम के कुछ पत्ते भी खाते हैं। शीतला माता के एक हाथ में नीम के पत्ते होते हैं। नीम में औषधीय गुण होते हैं। इसके सेवन से व्यक्ति कई प्रकार के रोगों से सुरक्षित रहता है।

स्वच्छता एवं आरोग्य की देवी हैं शीतला माता।
शीतला माता की कृपा से व्यक्ति निरोगी रहता है। वे स्वच्छता एवं आरोग्य की देवी है। अपने एक हाथ में शीतल जल से भरा हुआ कलश धारण करती हैं। एक हाथ में सूप और दूसरे हाथ में झाड़ू रखती हैं। ये सभी वस्तुएं स्वच्छता का प्रतीक हैं।