जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
एक तरफ जहा भाजपा पार्टी अपने वोटो को भुनाने के लिए राम मंदिर निर्माण सहित हिन्दू विरोधी लोगो के लिए सियासी बयानबाजी करती हुई नजर आती है। वही अब राजस्थान मे गहलोत सरकार द्वारा बजट मे सभी वर्गों का ध्यान रखते हुए मास्टर स्टोक लगाने के बाद अब हिंदू वोट बैंक को साधने के लिए देवस्थान विभाग के जरिए शिवरात्रि से एक सप्ताह तक श्रीमद् भागवत कथा शुरू की गई है। गहलोत सरकार के इस कदम को साल 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
दरअसल देवस्थान विभाग की ओर से मंगलवार से 7 मार्च के बीच जयपुर के जलमहल के सामने स्थित परशुराम द्वारा मंदिर में भागवत कथा सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। गंगा जमुना तहजीब के प्रतीक के रूप में जयपुर को जाना जाता है और छोटी काशी के रूप में भी जाना जाता है। यही वजह है कि भागवत कथा के लिए जयपुर को चुना गया है। भागवत कथा से पहले कलश यात्रा निकाली गई। जिसमें जलदाय मंत्री डॉ.महेश जोशी और देवस्थान विभाग की मंत्री शकुंतला रावत ने कलश यात्रा का नेतृत्व किया। कांग्रेस नेता राजीव अरोड़ा भी कलश यात्रा के दौरान मौजूद रहे। हालांकि कांग्रेस के कल्चर में इस तरह के धार्मिक आयोजनों कराने की परंपरा नहीं है और कांग्रेस पार्टी धार्मिक आयोजनों से बचती रही है। परंतु अब राजनीतिक गलियारे में अभी सरकार के इस मास्टर प्लान की चर्चा जोर शोरो से है। कांग्रेस के गलियारों में चल रही चर्चाओं की माने तो गहलोत सरकार के सॉफ्ट हिंदुत्व का फायदा विधानसभा चुनाव में मिल सकता है। भाजपा के परंपरागत वोट बैंक में इसके जरिए सेंध लगाई जा सकती है। इसीलिए सरकार अब सॉफ्ट हिंदुत्व पर चल रही है।