श्रीगंगानगर-राकेश मितवा।
यूक्रेन-रूस मे युद्ध होने के बाद राजस्थान के करीब 800 विधार्थी यूक्रेन मे फंसे हुए है। जिससे अभिभावकों टेंशन मे आ गये है। अभिभावक लगातार अपने बच्चों से मोबाइल और सोशल मीडिया के जरिए पल पल की रिपोर्ट ले रहे है। इसी प्रकार राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले से भी दर्जनों की तादाद में छात्र एमबीबीएस करने यूक्रेन के अलग-अलग विश्वविद्यालयों में गए हुए हैं। श्रीगंगानगर के दुष्यंत सिराव और हनुमानगढ़ के ललित कुमार भी यूक्रेन की सुमी मेडिकल कॉलेज के छात्र हैं।
इन्होंने फोन कर राज-काज न्यूज संवाददाता को बताया कि स्थानीय प्रशासन भारतीय छात्रों को पोलैंड के जरिए वापस देश भेजना चाहती है। जबकि सुमि शहर से पोलैंड की दूरी करीब 1500 किलोमीटर है। वही रूस की दूरी वहां से महज 30 किलोमीटर के करीब है। ऐसे में यह छात्र चाहते हैं कि पोलैंड की बजाय उन्हें रूस जाने की इजाजत दी जाए ताकि वहां से मास्को होते हुये भारत आ सके। उन्होंने कहा कि वे बिना किसी वाहन के खुद ही रूस तक जा सकते हैं। क्योंकि वहां सैन्य गतिविधियां थोड़ी कम है और भारतीय छात्रों को वहां नरमी से पेश आया जा रहा है। छात्र दुष्यंत सिराव ने बताया कि पिछले काफी समय से लगातार सरकार द्वारा उन्हें निकालने के लिए आश्वासन दिए जा रहे हैं। मगर अभी तक कोई कारगर उपाय नहीं हुआ और न ही वे यहां से भारत वापस जा पाए और इसी बीच यहां युद्ध की स्थितियां काफी तेज हो चुकी है। ऐसे में उनकी जान संकट में है। भारत को चाहिए कि उनके अपने देश के नागरिकों को अतिशीघ्र यहां से सुरक्षित निकाला जाए।
छात्रा रिजुल फंसी यूक्रेन में, युद्ध के कारण भयानक मंजर, परिजन हुए चिंतित।
रूस व यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के कारण वहां फंसे भारतीय नागरिकों को लेकर पूरा देश चिंतित है। यूक्रेन में फंसे भारतीय नागरिकों में अनूपगढ की बेटी रिजुल भी शामिल है जो शहर के वार्ड नं 33 की निवासी है। रिजुल के पिता अजय सारस्वत व उनकी माँ प्रियंका काफी ज्यादा चिंतित और परेशान है। रिजुल के पिता अजय ने बताया कि उनकी बेटी रिजुल मेडिकल के चौथे वर्ष की छात्रा है जो फिलहाल यूक्रेन के रुबिजनी शहर में युद्ध की भीषन परिस्थितियों में फंस गई है। रिजुल के साथ लगभग 100 स्टूडेंट्स भी फंसे हुए जो भारत के अलग-अलग इलाको से है। रिजुल फिलहाल परिवार के सम्पर्क है। साथ ही परिजनों की लगातार बात भी हो रही है। रिजुल ने बताया कि उन्हें मार्शल की सुरक्षा में रखा हुआ है। धमाको व गोलीबारी की आवाजो के कारण काफी भयानक मंजर छाया हुआ है। उन्होंने बताया कि भारतीय दूतावास ने उन्हें सुरक्षित भारत पहुंचाने का आश्वासन दिया है। लेकिन दूतावास से भारतीय नागरिकों का सही ढंग से सम्पर्क नही हो रहा।उन्होंने बताया कि हालात यह है कि खाने-पीने सामान व रूपए कम पड़ने लगे है जबकि सुपर मार्केट व एटीएम में काफी भीड़ के कारण परेशान होना पड़ रहा है।
भारतीय नागरिकों को पोलेंड व पड़ोसी देशों से रेस्क्यू किया जाएगा, लेकिन वहां जाए कैसे?
रिजुल ने बताया कि रुबिजनी(यूक्रेन) जहां वे फंसी हुई है वहा से पोलेंड की सीमा करीबन 2 हजार किलोमीटर की दूरी पर है। लेकिन वहां जाए कैसे? क्योंकि यूक्रेन में ट्रांसपोर्ट बन्द अव्यस्त होने से आवागमन बाधित है।फ्लाइट्स, ट्रेन-बस व अन्य साधन भी नही मिल रहे जिससे पोलेंड पहुंचा जा सके।
अभिभावकों की अपील भारत सरकार बच्चों की कराए वतन वापसी।
रिजुल के पिता अजय और माँ प्रियंका ने सरकार से अपील करते हुए कहा है कि सरकार उनकी बेटी व तमाम भारतीय नागरिकों को सुरक्षित भारत वापसी करवाये। उन्होंने कहा कि भगवान से प्रार्थना है कि सभी बच्चे भारत सुरक्षित लौटे। यूक्रेन में हालात बदतर होने लगे है जिससे काफी परेशानी बढ़ गयी है। डॉक्टर बनने के सपने बच्चो के धूमिल होने लगे है। चिंतित परिजन बच्चों व भारतीय दूतावास से सम्पर्क बनाएं हुए है तथा बच्चो की हिम्मत बढ़ा रहे हैं।

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