जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
राजस्थान सरकार की ओर से गठित विप्र कल्याण बोर्ड में अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के अलावा 7 गैर सरकारी सदस्यों का भी मनोनयन अभी होना बाकी हैं।  राज्य सरकार की ओर से जारी अधिसूचना में विप्र कल्याण बोर्ड की गर्वनिंग बॉडी के साथ बोर्ड के कर्तव्यों को भी स्पष्ट किया गया हैं। अधिसूचना के अनुसार कुल नौ पद गैर सरकारी इस बोर्ड में है उसमें से अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष की नियुक्ति की जा चुकी है। जबकि 7 गैर सरकारी सदस्यों की नियुक्ति अभी होना बाकी है। बोर्ड में इसके अलावा सरकारी सदस्यों के रूप में उद्योग आयुक्त अथवा उसका संयुक्त निदेशक स्तर का अधिकारी, शासन सचिव स्कूल शिक्षा अथवा उसका संयुक्त निदेशक स्तर क अधिकारी प्रतिनिधि होंगे। इसके अलावा देवस्थान आयुक्त, श्रम निदेशक एवं उसका प्रतिनिधि, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के निदेशक अथवा उसका कोई प्रतिनिधि होंगे। बोर्ड सचिव के रूप में सामाजिक न्याय विभाग का संयुक्त स्तर का अधिकारी तैनात होगा। बोर्ड बैठकों में राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास सहकारी निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अथवा प्रतिनिधि को आमंत्रित किया जाएगा।

विप्र बोर्ड के यह है मुख्य उद्देश्य।

विप्र कल्याण बोर्ड के मुख्य उद्देश्यों में मंदिर मठों के पुजारियों, कर्मकाण्ड से जुड़े अन्यों के साथ सेवादारों आदि को बेहतर अवसर व सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए इसका अध्ययन कर सरकार को सुझाव देना प्रमुख रूप से शामिल हैं। इस वर्ग की आर्थिक अभिवृद्धि तथा विकास को लेकरें भी बोर्ड अपने सुझाव सरकार को प्रेषित कर सकेगा। सामाजिक बुराइयां कैसे दूर होगी इस बारे में भी बोर्ड अपनी राय से सरकार को अवगत करवा सकेगा। विप्र समाज के लिए बनी विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ विभिन्न विभाग के समन्वय से संभव हो सकता है इसकी सिफारिश भी बोर्ड सरकार को करेगा। विप्र समाज की कला एवं संस्कृति को बढ़ावा देने के सुझाव भी बोर्ड सरकार को सुझाएंगा।