चित्तौड़गढ़-गोपाल चतुर्वेदी।
भारत माता की जय, वंदे मातरम, जय राणा प्रताप की, जय शिवा सरदार की जैसे नारों से पूरा दुर्ग शनिवार को गुंजयमान हो गया। यह नजारा था चित्तौडग़ढ़ मे विशाल हरावल साइकिल यात्रा का। सबके मन में देशभक्ति की भावना जागृत करने और अपने मातृभूमि के लिए मर मिटने का जज्बा जगाने के लिए छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग शनिवार को दुर्ग पर साइकिल लेकर चढ़ाई की। इस दौरान सभी के जुबान पर भारत माता की जय का नारा था। वहीं, देश भक्ति के गाने भी गूंज रहे थे। चित्तौड़गढ़ जिले में स्वराज-75 आयोजन समिति द्वारा विशाल हरावल साइकिल यात्रा का आयोजन किया गया। इसमें RSS संघ ने सहयोग किया। पहली बार दुर्ग के पहले गेट से साइकिल के साथ चढ़ाई की गई और दुर्ग के फतेह प्रकाश महल तक जाकर समाप्त हुई। इस दौरान कई तहसीलों के गांवों से छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों ने भी भाग लिया। दुर्ग के हर द्वार पर बच्चों ने भारत माता और कई शहीदों के सजीव झांकी बनाई। बच्चों ने एक बार फिर भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस, वीर सावरकर बन कर उनकी याद दिला दी। सभी बच्चे अपने हाथ में तिरंगा और भगवा ध्वज लेकर ऊपर चढ़ाई चल रहे थे।कार्यक्रम समन्वयक भूपेंद्र आचार्य ने बताया कि देशभक्ति हमारे अंदर कमजोर पड़ रही है। राष्ट्र भाव की भावना को फिर से एक बार जागृत करने के लिए इस शक्ति और भक्ति की धरा पर विभिन्न गांवों से बच्चों से लेकर बुजुर्गो ने भी भाग लिया। यह 75वां स्वराज का पर्व है, जिसे स्वराज 75 आयोजन समिति ने आयोजित किया है। इसमें संघ ने इनका साथ दिया। उन्होंने कहा कि हमने पहले सिर्फ 775 लोगों को आने का आह्वान किया था। लेकिन देश प्रेम के नाम पर यहां लगभग 1500 लोग एकत्रित हो गए। हम ने सभी सूचनाएं तहसील स्तर पर दी थी। नगर के सामाजिक संस्थाओं और संगठनों के साथ-साथ निजी शैक्षणिक संस्थाओं को भी इस बारे में जानकारी दी थी। हम अपने ही महापुरुषों की गाथा गाना भूल गए। इसीलिए उनकी यादों को संजीव करने के लिए ही संजीव झांकियां बनाई और बच्चों के द्वारा ही जन जन तक उनके बारे में जानकारी पहुंचाई गई। यहां पर बच्चों ने वीर सावरकर, भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस, भारत माता बनकर एक बार फिर से उनकी याद दिला दी। स्वतंत्रता का समय नहीं होने पर भी लड़े थे वीर जवान, उन्हें याद किया। वहीं राष्ट्रीय सेविका समिति की प्रांतकारी वंका वंदना वजीरानी ने कहा कि आजादी के 75वें साल में स्वराज-75 ने अलग-अलग कार्यक्रम किए हैं। इसी क्रम मे साइकिल यात्रा का आयोजन किया गया। बड़ीसादड़ी, छोटीसादड़ी, डूंगला, निंबाहेड़ा, कपासन से बच्चे साइकिल लेकर पाडनपोल पहुंचे और वहां से देश भक्ति के गाने गाते हुए साइकिल लेकर फतेह प्रकाश महल पहुंचे। वजीरानी ने कहा हम स्वतंत्र हैं और स्वतंत्र समय पर जी रहे हैं। लेकिन पुराना समय स्वतंत्रता का नहीं था। उसे पाने के लिए जिन लोगों ने बलिदान किया है, उनको याद करने का समय है। उनको श्रद्धांजलि देने के रूप में सभी पर लोग साइकिल लेकर पैदल दुर्ग पर चढ़े। इससे पर्यावरण संरक्षण का भी मैसेज आता है कि पर्यावरण को बचाने के लिए साइकिल का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करना चाहिए।
अग्रिम पंक्ति में लड़ने वाले को कहा जाता है हरावल।
इस यात्रा को हरावल साइकिल यात्रा का नाम दिया गया। हरावल का मतलब होता है जो अग्रिम पंक्ति पर खड़ा होकर युद्ध लड़ सके। यहां छोटे बच्चे जरूर थे और ना ही किसी युद्ध पर लड़ने जा रहे थे। लेकिन हर बच्चा यह संदेश देना चाहता था कि अगर कभी भी भारत माता पर कोई मुसीबत आई तो वह अग्रिम पंक्ति पर रहकर लड़ाई लड़ेंगे। लेकिन भारत मां पर आंच नहीं आने देंगे। इसी जज्बे के साथ सभी बच्चों ने जोश और शोर के साथ भाग लिया।
भाजपा जनप्रतिनिधियों ने लिया भाग।
साइकिल यात्रा में डीजे में देश भक्ति गाने चलाए जा रहे थे। सुबह 9 बजे सभी पाडनपोल पर सब एकत्रित हुए, वहां पर सांसद सीपी जोशी, पूर्व यूडीएच मंत्री श्रीचंद कृपलानी, भाजपा जिलाध्यक्ष गौतम दक, पूर्व नगर परिषद सभापति सुशील कुमार शर्मा, गौरव त्यागी, राजन माली सहित कई जनप्रतिनिधियों ने भी दुर्ग पर चढ़ाई कर इस यादगार पल में शामिल किया।फतहप्रकाश महल तक पहुंचने के बाद वहां बौद्धिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ।

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