सपोटरा से विनोद कुमार जांगिड़।
राजस्थान सरकार जहां शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है और बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन देने के लिए निशुल्क साइकिल वितरण योजना के माध्यम से कक्षा नवी में पढ़ने वाली छात्राओं को फ्री में साइकिलो का वितरण कर रही है। लेकिन करौली जिले के उपखंड सपोटरा की ग्राम पंचायत इनायती का राजकीय उच्च माध्य विद्यालय खुलेआम गहलोत सरकार के आदेशों की धज्जियां उड़ाता हुआ नजर आ रहा है और जहां गहलोत सरकार बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन देने के लिए फ्री में साइकिल वितरण करवा रही है। वहीं राजकीय उच्च माध्य. विद्यालय इनायती के अध्यापकों के द्वारा कक्षा नौवीं में अध्ययनरत सत्र 2020-21व 2021-22 की कुल 76 बालिकाओं से किराए के नाम पर बालिकाओं से पचास पचास रुपए की वसूली की गई है। जो सरासर गलत है। शिक्षा विभाग के आदेशों की खुलेआम अवहेलना हो रही है, लेकिन शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों का बालिकाओं से पचास पचास रुपए की वसूली करने के मामले की ओर कोई ध्यान नहीं है जिसके कारण ग्रामीणों में खासा रोष व्याप्त है।

यह है पूरा मामला- 
दरअसल राज्य सरकार द्वारा बालिका शिक्षा प्रोत्साहन योजना के तहत कक्षा नौवीं में अध्ययनरत बालिकाओं को फ्री में साइकिल मिलने पर जहां छात्राओं के चेहरे पर मुस्कान छाई वही जब राजकीय उच्च माध्य. विद्यालय इनायती के अध्यापकों के द्वारा किराए के नाम पर बालिकाओं से पचास पचास रुपए की वसूली की गई तो बालिकाओं के चेहरों पर मायूसी छा गई। जिसका बालिकाओं के द्वारा विरोध भी किया गया लेकिन विद्यालय के गुरुजी ने नोडल विद्यालय से साइकिलों को वाहनों में भरकर स्थानीय स्कूल तक लाने के नाम पर प्रति छात्रा पचास पचास रुपए देने की बात कही जिस पर सभी बालिकाओं ने मजबूर होकर विद्यालय के शिक्षकों को पचास पचास रुपए जमा करा दिए। लेकिन बालिकाओं के अभिभावकों ने इसका विरोध किया और इसकी सूचना मीडिया को दी तो पुरी पोल खुलती हुई नजर आई।

मीडिया के कैमरे पर बालिकाओं ने खुलकर लगाए शिक्षको पर वसूली के आरोप।
गहलोत सरकार द्वारा कक्षा नौवीं में अध्ययनरत बालिकाओं को फ्री में दी जा रही साइकिल के किराए के नाम पर विद्यालय के अध्यापकों के द्वारा पचास पचास रुपए वसूलने के मामले की सच्चाई को जानने के लिए जब बालिकाओं से पूछा तो मीडिया के कैमरे पर साइकिल प्राप्त करने वाली बालिकाओं ने खुलकर अध्यापकों के द्वारा किराए के नाम पर पचास पचास रुपए वसूलने के आरोप लगाए। वहीं अध्ययनरत बालिकाओं के अभिभावकों ने विद्यालय के अध्यापकों द्वारा वसूली गई राशि के मामले की निष्पक्ष जांच कर रुपए वसूलने वाले के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
मीडिया की लगी खबर तो शीतकालीन छुट्टियों के बाद स्कूल खुलते ही काट डाली विकास शुल्क की रसीद।
सरकार द्वारा बालिका शिक्षा प्रोत्साहन के लिए नौवीं कक्षा में अध्ययनरत बालिकाओं को दी जा रही निशुल्क साइकिल के बदले किराए के नाम पर बालिकाओं से पचास पचास रुपए की वसूली करने की हकीकत को सामने लाने के लिए 30 दिसंबर को मीडिया ने ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर जांच पड़ताल शुरू की तो इसकी खबर तुरंत विद्यालय के गुरुजी तक भी पहुंच गई और मामले को दबाने के लिए विद्यालय के गुरुजी ने शीतकालीन छुट्टियों के बाद स्कूल खुलते ही आनन-फानन में विकास शुल्क के नाम पर पिछले दिनांक यानी 22 दिसंबर 2021 में पचास पचास रुपए की रसीद काट डाली। जबकि बीच सत्र में केवल बालिकाओं के अभिभावको से विकास शुल्क लेने का शिक्षा विभाग द्वारा कोई नियम या आदेश जारी नहीं किया गया है। जो जांच का विषय है।
इनका कहना है कि मामले मे स्कूल के प्रधानाचार्य संतराम मीणा ने बताया कि ऐसी कोई वसूली नहीं हुई अभिभावको ने विकास फंड में योगदान दिया है। इसको लोग किस रुप में ले रहे हैं यह अलग बात है।

अधिकारी बोले मामला जांच का विषय।
मामले को लेकर मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी अधिकारी सपोटरा पुष्पेंद्र सिंह जादौन ने कहा कि राज सरकार द्वारा बालिका शिक्षा प्रोत्साहन योजना के तहत साइकिल वितरण पूर्णतया निशुल्क है। उसमें किसी भी तरह का कोई परिवहन शुल्क या अन्य शुल्क शामिल नहीं हैं। यदि वास्तव में उन्होंने किराए के नाम पर पैसे वसूले हैं तो उसकी जांच करा लेंगे सीधी बात यह है कि ये जांच का बिंदु है यदि परिवहन के नाम से पैसा वसूल किया है तो सारा पैसा रिफंड करवा दिया जाएगा। वही जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) भरतलाल मीणा ने मामले को लेकर कहा कि जांच कराई जायेगी जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कारवाई की जायेगी।