जालोर गणपत सिंह मांडोली
जालोर जिले के बागरा पुलिस थाना इलाके में 9 नवंबर 2021 के दिन एक नाबालिग का अपहरण और फिर रेप किया जाता है। मामले में पीड़ित परिवार की ओर से नामजद दो आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाई जाती है। लेकिन रसूख और रुपयों की ताकत देखों एफआईआर में नाम होने के बावजूद पुलिस एक आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर देती है। जबकि दूसरे आरोपी को 12 दिन बाद भी गिरफ्तार नहीं किया गया। जबकि पीड़ित परिवार बार बार दो आरोपियों के होने का दावा कर रहा है और दोनों को सजा दिलाने की मांग कर रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया तो दूसरे को क्यों नहीं किया। क्या जालोर पुलिस दूसरे आरोपी को बचाने का प्रयास कर रही है, अगर हां तो क्यों!
यह है पूरा मामला।
पुलिस के मुताबिक बागरा पुलिस थाना इलाका निवासी एक युवक ने 11 नवंबर को रिपोर्ट दर्ज करवाई कि 9 नवंबर की शाम को उसकी नाबालिग बहन बाजार गई थी। इस दौरान सांथू गांव निवासी कैलाश पुरोहित और प्रवीण पुरोहित ने उसकी बहन को गाड़ी में ले गए। इसके बाद रात को एक सूनसान इलाके में ले जाकर उसे नशीला पदार्थ पिलाया और नशे के हालत में उसके साथ दुष्कर्म किया। आरोपी प्रवीण पुरोहित ने उसके साथ रेप किया और उसके साथ कैलाश पुरोहित ने उसका साथ दिया। मामले में पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। जांच सीओ हिम्मत सिंह चारण को दी गई।
प्रवीण पुरोहित गिरफ्तार, कैलाश का पता ही नहीं।
नाबालिग के अपहरण और रेप मामले में दो युवकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई गईं। इसमें पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज होने के बाद कार्रवाई करते हुए एक आरोपी प्रवीण को गिरफ्तार कर लिया,जबकि कैलाश पुरोहित के संबंध में अभी तक कोई जानकारी नहीं दी गई। जब राज-काज न्यूज ने जांच अधिकारी सीओ हिम्मत सिंह चारण से इस संंबंध में बातचीत की गई तो उन्होंने फोन काट दिया, जवाब नहीं दिया।
पुलिस पर आरोपी को बचाने के आरोप क्यों।
1.एफआईआर में नाम तो गिरफ्तारी क्यों नहीं:— दुष्कर्म पीड़िता की ओर से एफआईआर में दोनों आरोपियों के नाम दर्ज करवाए गए। नामजद रिपोर्ट दर्ज होने के बाद भी दूसरे आरोपी की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई!
2.पीड़ित परिवाद का आरोप दोनों पकड़े गए, कोर्ट में एक ही दिखाया:— मामले में राज-काज न्यूज संवाददाता गणपत सिंह ने पीड़िता के भाई से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि दो आरोपियों के नाम रिपोर्ट दी थी। पुलिस ने दोनों आरोपियों को पकड़ा था, लेकिन इसके बाद कोर्ट में केवल एक ही आरोपी को पेश कर गिरफ्तार किया गया।
3. पीड़िता का आरोप काले रंग के शीशे लगी गाड़ी दूसरे आरोपी की:— रेप पीड़िता के मुताबिक प्रवीण और उसका दोस्त कैलाश बाजार में थार जीप लेकर आए थे, इस दौरान उन्होंने उसे बाजार में छोड़ने का झांसा दिया और जीप में अंदर बैठा लिया। इसके बाद सूनसान इलाके में ले जाकर रेप किया। थार जीप कैलाश पुरोहित की बताई जा रही है।
आरोपियों ने पीड़िता को दी जान से मारने की धमकी।
पीड़िता के भाई ने बताया कि आरोपियों ने पीड़िता को जीप में बैठाकर रात के अंधेरे में सूनसान इलाके में ले गए। इसके बाद आरोपियों ने एक कमरे में बंद कर दुष्कर्म किया। वहीं चिल्लाने पर जान से मारने की धमकी दी। आरोप है कि दोनों युवकों ने उसे हाथ पांव बांधकर होद में डालकर मारने की धमकी दी। इससे पीड़िता डर गई। आरोपियों ने रेप के बाद उसे बागरा के नजदीक छोड़ दिया। जहां लोगों ने उसे बेसुधी की हालात में पाया और उसके परिजनों को सूचना दी।
पैसे और रसूख का खेल: दूसरे आरोपी को बचाने का प्रयास।
राज-काज न्यूज की जांच में सामने आया है कि इस मामले में पुलिस एक आरोपी को बचाने का प्रयास कर रही है। इसका मुख्य कारण रसूख और रुपए है। आरोपियों में से एक आरोपी के पिता पंचायत में बतौर जनप्रतिनिधि है। वहीं दूसरी ओर पीड़ित परिवार का यह भी आरोप है उन पर 20 लाख रुपए लेकर राजीनाम करने का दबाव बनाया गया। लेकिन उन्होंने इससे इनकार कर दिया।
जांच अधिकारी का गैर जिम्मेदाराना जवाब।
मामले में जांच अधिकारी सीओ हिम्मत सिंह चारण से जब बातचीत की गई तो वे जवाब टालते हुए नजर आए। सीओ चारण ने बताया कि पीड़िता के कोर्ट में बयान करा दिए और एक आरोपी की गिरफ्तार कर ली। जब दूसरे आरोपी के संबंध में पूछा गया तो वे अनुसंधान जारी है कहते हुए सवाल को टाल गए। जब दोबारा आरोपी कैलाश के संबंध में पूछताछ की गई तो अनुसंधान जारी है कहते हुए फोन को काट दिया।
मामले में एक आरोपी को किया गिरफ्तार।
जालोर पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन अग्रवाल का कहना है कि बागरा पुलिस थाना इलाके में नाबालिग से रेप का मामला सामने आया था। इस संबंध में एक आरोपी की गिरफ्तारी हो गई। इस संबंध में जांच अधिकारी अधिकारी जानकारी दे पाएंगे।
पुलिस की होती रही है किरकिरी।
ये राजस्थान पुलिस है जनाब, यहां रुपयों के लालच में पुलिस अधीक्षक तस्करों की गाड़ियां सीमा पार करवाने तक का काम करते है तो पुलिस थानाधिकारी रुपयों के ही लालच में हाथ आए तस्करों को भगाने जैसे काम कर रहे हैं। बदमाशों से रिश्वत की मांग या तस्करों से सांठगांठ तक तो एक बार ठीक लेकिन अब तो पुलिस नाबालिग से अपहरण कर रेप जैसे संगीन मामलों तक में नामजद आरोपियों को बचाने का प्रयास कर रही है। यह भी किसी अपराध से कम नहीं है। अपराधियों या अपराधियों को बचाने वालों के खिलाफ भी सख्ती बरतनी चाहिए, फिर चाहे वो पुलिस अधिकारी ही क्यों ना हो!

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