उदयपुर से भगवान प्रजापत।
उदयपुर में करीब 1 महीने की देरी से शुरू हुए प्रशासन गांवों के संग अभियान में पहले ही दिन प्रशासन को जमकर विरोध का सामना करना पड़ा। शहर से सटी बेदला ग्राम पंचायत में प्रधान और सरपंच सहित अन्य प्रतिनिधियों ने प्रशासनिक अधिकारी के लिए लगी टेबलों को हटवा दिया। और तो और आसपास की पंचायतों के सरपंचों और स्थानीय नेताओं ने भी नारेबाजी कर हंगामा किया और वहां लगे टेंट भी खुलवा दिए। बढ़ते हंगामे के बीच सुखेर थाना पुलिस को बीच-बचाव कर मामला शांत करवाना पड़ा। दरअसल सोमवार को अभियान के पहले दिन उदयपुर की बेदला समेत 12 स्थानों पर यह शिविर लगाए गए। 
बेदला में एसडीएम सलोनी खेमका की मौजूदगी में बड़गांव प्रधान प्रतिभा नागदा और स्थानीय सरपंच नरेश प्रजापत सहित आसपास की पंचायतों के आधा दर्जन सरपंचो ने नारेबाजी करते हुए विरोध किया। इसी दौरान उन्होंने अफसरों के लिए लगाई गई टेबल्स को भी हटा दिया और हंगामा कर टेंट खुलवा दिए। हंगामे की सूचना पर सुखेर थाना अधिकारी मुकेश सोनी समेत पुलिस जाब्ते ने बीच-बचाव कर मामला शांत करवाया। करीब एक घंटे तक यह हंगामा चलता रहा। विरोध कर रहे सरपंच और स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि न तो यूआईटी पेराफेरी क्षेत्र के लोगों को पट्टे दे रही है और ना ही सरपंचों के पास कोई अधिकार है। ऐसे में इन शिविरों को लगाने का क्या औचित्य है। 
उन्होंने कहा कि यूआईटी के अधिकारी इस मामले में गंभीरता से ध्यान नहीं दे रहे है और गांव की जनता उनसे जवाब मांगती है। विरोध कर रहे सरपंचों प्रतिनिधियों ने कहा कि या तो युआईटी अपने स्तर पर पट्टे बांटे या फिर पंचायतों को जमीन वापस लौटाकर सरपंचो को अधिकार दे, ताकि आमजन को राहत दी जा सके। यदि किसी पंचायत में पट्टे ही नहीं दिए जा सकते है तो फिर ऐसे शिविर को लगाने का क्या फायदा है। बडगांव प्रधान प्रतिभा नागदा ने बताया कि प्रशासन महज औपचारिकता को पूरी करने के लिए यह शिविर लगा रहा है, जबकि इसका फायदा ग्रामीणों को नहीं मिल पाएगा। लगातार भू माफिया उनके इलाके में यूआईटी से मिलीभगत कर धड़ल्ले से अवैध निर्माण करवा रहे हैं लेकिन हम लोग कोई कार्रवाई नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि इस मामलें ठोस निस्तारण तक यूआईटी के पैराफेरी क्षेत्र में आने वाली 14 ग्राम पंचायतों में प्रशासन को कैंप नहीं लगाने दिया जाएगा। इस दौरान एसडीएम सलोनी खेमका समेत कई प्रशासनिक अधिकारी सरपंच और हंगामा कर रहे प्रतिनिधियों से समझाइश का प्रयास करते रहे। हंगामे के बाद विरोध कर रहे सभी लोग जिला कलेक्टर को ज्ञापन देने के लिए चित्रकूट नगर रवाना हो गए। एसडीएम ने कहा कि जिला कलक्टर को समस्या बता दी गई है। आगे से दिशा-निर्देश मिलने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।