सपोटरा विनोद कुमार जांगिड़।
राजस्थान सरकार जहां बच्चों को शिक्षा देने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है वही राजस्थान के करौली जिले में एक सरकारी विद्यालय ऐसा है जहां पर विद्यालय के अध्यापक अध्यापिका बच्चों के बीच दिन भर मोबाइल स्मार्टफोन चलाते हैं। जी हां हम बात कर रहे हैं राजस्थान के करौली जिले के उपखंड सपोटरा की ग्राम पंचायत बाजना के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय रामठरा के सरकारी विद्यालय की। जहां पर स्कूल के अध्यापक अध्यापिका बच्चों को पढ़ाने के बजाय ग्राउंड में स्मार्टफोन चलाते हैं।
ग्रामीणों से मिल रही शिकायतों पर हकीकत को जानने के लिए मंगलवार को राज-काज संवाददाता विनोद कुमार जांगिड़ जब राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय रामठरा पहुंचा तो स्कूल के ग्राउंड में स्कूल की एक अध्यापिका और अध्यापक स्मार्टफोन चलाते हुए मिले। जैसे ही संवाददाता ने स्मार्टफोन चलाने की फोटो और वीडियो लेने के लिए कैमरा निकाला तो आनन-फानन में अध्यापिका और अध्यापक अपने क्लासों की ओर जाने लगे लेकिन तब तक दोनों की हरकत कैमरे में कैद हो गई।
जब संवाददाता के द्वारा स्कूल में चल रही बच्चों की क्लास में जाकर देखा गया तो वहां पर क्लास में अध्यापक की कुर्सी खाली पड़ी हुई थी और बच्चे बैठे हुए थे। लेकिन बच्चों को शिक्षा देने वाले गुरुजी नदारद थे। जब संवाददाता ने बच्चों से गुरुजी के द्वारा नहीं पढ़ाने को लेकर पूछा तो बच्चे कुछ नहीं बोले और चुप हो गए।छोटे बच्चे होने के कारण जब संवाददाता ने विद्यालय की कक्षा 6 में जाकर देखा तो वहां पर भी अध्यापक की कुर्सी खाली पड़ी हुई थी और बच्चे किताबों को सामने रखकर बैठे हुए थे। लेकिन क्लास में बच्चों को पढ़ाने वाला कोई भी मौजूद नहीं था जब संवाददाता ने स्कूल में अध्यापक अध्यापिका के बिना क्लासों में बैठे बच्चों के बारे में प्रधानाध्यापक विजेंद्र गुप्ता से बात की तो उन्होंने कहा कि वर्तमान में विद्यालय में कुल 121 बच्चों का नामांकन है और विद्यालय में 5 अध्यापक और एक अध्यापिका पदस्थापित है लेकिन विद्यालय के एक अध्यापक अवकाश पर है और एक अध्यापक विद्यालय की डाक लेने तथा पुस्तक लेने बाजना विद्यालय गए हुए हैं। उन्होंने बताया कि हमारे द्वारा कक्षा 1से 3 और कक्षा 4 व 5 के बच्चो को सम्मिलित रूप से बैठाया हुआ है तथा कक्षा 6, 7 और 8 को अलग-अलग बैठाया हुआ है। जब संवाददाता द्वारा प्रधानाध्यापक से विद्यालय के अध्यापक अध्यापिका के द्वारा बच्चों के बीच ग्राउंड में स्मार्टफोन चलाने की बात कही गई तो प्रधानाध्यापक ने मामले को दबाने के लिए विद्यालय से संबंधित कार्य करने की बात कही जो अब जांच का विषय है। लेकिन विद्यालय में क्लास 1 से तीन और क्लास 4 और 5 बिना अध्यापक के ही चल रही थी। ऐसे में जब विद्यालय के अध्यापक अध्यापिका स्कूल समय के दौरान स्मार्टफोन चलाते हो तो आखिर कैसे बच्चों को शिक्षा मिल पाएगी यह बड़ा सवाल है। जबकि राजस्थान सरकार के द्वारा 27 अक्टूबर 2019 से स्कूलों में अध्यापक अध्यापिका के स्मार्टफोन चलाने पर रोक लगाई हुई है। संवाददाता ने बिना गुरुजी के क्लास में बैठे बच्चे और स्मार्टफोन चलाते अध्यापक अध्यापिका के बारे में मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी पुष्पेंद्र सिंह जादौन से बात की तो उन्होंने कहा कि वह छुट्टी पर है और यदि स्कूल समय के दौरान अध्यापक अध्यापिका स्मार्टफोन चला रहे हैं तो यह गलत बात है यदि ऐसा है तो मामले की जांच करवाएंगे और लापरवाह के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी। अब देखने वाली बात यह होगी कि शिक्षा विभाग ऐसे लापरवाह अध्यापक और अध्यापिका पर क्या कार्रवाई करता है।

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