उदयपुर से भगवान प्रजापत।
नगर निगम के अतिक्रमण निरोधी दस्ते को शनिवार को धानमंडी में कार्यवाही के दौरान व्यापारियों और स्थानीय लोगों का विरोध झेलना पड़ा। दरअसल शहर से अतिक्रमण हटाने के लिए निगम ने एक बार फिर अभियान चलाया और अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही को अंजाम दिया और लोगों को ऐसा दोबारा ना करने के लिए पाबंद भी किया गया। बता दे कि शहर में स्मार्ट सिटी के तहत कई निर्माण हुए थे। इसी के तहत नई सड़कें भी बनाई गई थी। इसके लिए स्थानीय लोगों को पहले से किसी भी स्थाई अतिक्रमण नहीं करने के लिए कहा गया था। मगर लोगों ने अपने घरों और दुकानों के बाहर स्थाई अतिक्रमण कर लिए।
धानमंडी में झेलना पड़ा विरोध
शहर के धानमंडी सहित आसपास के क्षेत्रों में व्यापारियों सहित अन्य लोगों ने स्थाई अतिक्रमण कर लिए और 2 से 2.5 फीट के चबूतरे बनाए लिये। इन चूबतरों पर काफी सारा सामान बाहर रख लिया गया। इसी के चलते नगर निगम ने यह अभियान चलाया। हालांकि कार्रवाई के दौरान निगम को व्यापारियों का काफी विरोध झेलना पड़ा। इसी के चलते नगर निगम आयुक्त हिम्मत सिंह बारहठ को कई बार मौके पर आकर लोगों से समझाइश करनी पड़ी। आयुक्त ने स्थानीय लोगों को कानून में हाथ लेने पर राजकार्य बाधा में कार्रवाई की चेतावनी तक देनी पड़ी। इस दौरान व्यापारियों ने विरोध और नारेबाजी भी की।
पुलिस ने किया हल्के बल का प्रयोग
निगम की और से लगातार समझाइश की गई लेकिन व्यापारी अतिक्रमण नही हटाने की मांग पर अड़े रहे और विरोध करते रहे। व्यापारियों और निगम के अधिकारियों के बीच कहासुनी के बाद पुलिस ने हल्के बल का प्रयोग करते हुए भीड़ को तीतर बीतर किया और उसके बाद अतिक्रमण को हटाने का काम शुरू किया।
समझाइश के बाद लोगों ने किया सहयोग
निगम अधिकारियों के समझाने के बाद कई लोगों ने समझदारी दिखाई। निगम अधिकारियों ने शहर के हित में लोगों से सहयोग की मांग की। इसके बाद कई व्यापारियों और स्थानीय लोगों ने खुद अपने दुकान-घरों के आगे से अतिक्रमण हटाया। जहां स्थाई अतिक्रमण था, उसे निगम ने तोड़ा। इस दौरान निगम की निर्माण शाखा, स्वास्थ्य शाखा, गैराज शाखा और अग्निशमन शाखा मौजूद रही।
अतिक्रमण निरोधी समिति के अध्यक्ष पर उठे सवाल
धानमंडी में व्यापारियों ने अतिक्रमण निरोधी समिति के अध्यक्ष छोगा लाल भोई की ओर से कर रखे अतिक्रमण को हटाने की मांग की। व्यापारियों ने कहा कि भोई ने भी अतिक्रमण कर रखा है लेकिन निगम उनके खिलाफ कार्यवाही नही करता हैं जबकि अन्य व्यापारियों के खिलाफ निगम के अधिकारी जोर जबरदस्ती कर दुकानांे के बाहर किए गये निर्माण को तोड़ने पर उतारू हैं।

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