जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।

जयपुर नगर निगम ग्रेटर में भाजपा के पार्षद दो धड़ों में बंटते नजर आ रहे है। एक धड़े से जुड़े करीब 50 पार्षदों ने सोमवार को पार्टी स्तर पर बिना कोई सूचना और बातचीत किए मौजूदा सरकार द्वारा तीसरी  बार 60 दिन के लिए बनाई गई कार्यवाहक मेयर शील धाबाई के खिलाफ बैठक की। बैठक जयपुर के एक होटल में गुपचुप तरीके से बुलाई गई। बैठक में भविष्य में मेयर पद के लिए प्रत्याशी के नाम पर भी चर्चा की गई। जिसमें लाइट समिति की अध्यक्ष सुखप्रीत बंसल के नाम की ज्यादा चर्चा रही। बैठक भवन निर्माण समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र श्रीमाली और अध्यक्ष सुखप्रीत बंसल की मौजूदगी में ही हुई।  बैठक को मेयर शील धाबाई के खिलाफ खोले गए मोर्चे की शुरूआत मान सकते है। क्योंकि अधिकांश पार्षद कार्यवाहक मेयर धाबाई की कार्यशैली से नाराज है। ढुलमुल कार्यशैली, पार्षदों की सुनवाई नहीं करना, वार्डो में विकास कार्य नहीं होने और समय पर साधारण सभा की बैठक नहीं बुलाने से ये पार्षद  कार्यवाहक मेयर से नाराज चल रहे हैं।मेयर के खिलाफ लामबंद होने की खबर जब बाजार में फैली तो इसे दबाने के लिए पार्षदों ने इस बैठक को संगठन की बैठक बताया और कहा कि इस बैठक में 24 अक्टूबर को प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया के जन्मदिवस कार्यक्रम को लेकर चर्चा की गई है। इस मामले में जितेन्द्र श्रीमाली ने कहा कि यह बैठक केवल संगठन में आगे क्या कार्य करने है इस पर चर्चा के लिए बुलाई है। जबकि सच्चाई ये है कि इस तरह की बैठकों में मेयर, डिप्टी मेयर, शहर अध्यक्ष सभी पदाधिकारी शामिल होते है। आपको बता दें, कि शीलधाबाई वर्तमान में कार्यवाहक मेयर है। निलंबित मेयर सौम्या गुर्जर का मामला अभी भी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। सरकार ने ही भाजपा की वरिष्ठ पार्षद और पूर्व में तीसरी बार 60 दिन की अवधि के लिए शील धाबाई को कार्यवाहक मेयर के तौर पर लगाया है और दो बार उनका कार्यकाल बढ़ा भी चुकी है। अगर सरकार को जिस समय सुप्रीम कोर्ट से जीत मिल जाएगी। उसके बाद सरकार कभी भी मेयर पद से शील धाबाई को हटाकर नये सिरे से चुनाव करवा सकती है।