ब्यूरो रिपोर्ट।
प्रदेश में कोरोना महामारी के लगभग विदा होने के बाद अब मौसमी बीमारियों का कहर टूट रहा है। मच्छर जनित रोग डेंगू और मलेरिया के साथ चिकनगुनिया, स्क्रब टायफस और स्वाइन फ्लू से पीडित मरीजों की तादाद बढ़ती जा रही है। राजधानी जयपुर में डेंगू का कहर टूट पड़ा है। मौजूदा हालातों की बात करें तो यहां सरकारी और निजी अस्पतालों में इस से पीड़ित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। चिकित्सा विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस साल डेंगू के केस 2000 के करीब पहुंच गए हैं। इसमें चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई है कि जिन इलाकों में कोरोना बेकाबू हुआ था वहां अब डेंगू का डंक भारी पड़ रहा है। हालात ये है कि प्रदेश के सबसे बड़े सवाई मानसिंह अस्पताल, जेके लोन अस्पताल, जयपुरिया और कांवटिया अस्पताल सहित कई अन्य बड़े सरकारी और निजी अस्पतालों में बेड लेने के लिए मरीजों को मशक्कत का सामना करना पड़ रहा है। ज्यादातर अस्पतालों के बेड़ फुल हो गए हैं। अस्पतालों की चिकित्सा व्यवस्था हालात को देखते हुए नाकाफी सिद्ध हो रही है। चिकित्सा विभाग के अनुसार जयपुर जिले में डेंगू के अब तक 1915 मरीज सामने आए हैं। इनमें से दो की मौत हुई है। डेंगू से ग्रसित मरीजों में ग्रामीण और शहरी इलाके की संख्या में ज्यादा अंतर नहीं है। शहरी इलाके में 1061 और ग्रामीण इलाके में 854 डेंगू के मरीज पाए गए हैं। वही जयपुर प्रथम की तुलना में जयपुर द्वितीय में केस ज्यादा मिले हैं। जयपुर में कोटपूतली, मानसरोवर, परकोटा क्षेत्र, सांगानेर, झोटवाड़ा, प्रताप नगर और वैशाली नगर इलाकों सहित कई क्षेत्र ऐसे हैं, जहां इसके सर्वाधिक रोगी मिले हैं। दूसरी ओर अब तक चिकनगुनिया के 204 और स्क्रब टायफस के 146 रोगी मिले हैं। स्वाइन फ्लू के भी 10 मरीज पाए गए हैं।

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