गलत खबर – दाऊद इब्राहिम गिरफ्तारटाइगर मेमन की हत्या

ऋषिकेश राजोरिया 

शिवसेना के सामने धरना-प्रदर्शन की घटना के बाद एक दिन 3 सितंबर 1993 को अनिल सिन्हा ने जावेद इकबाल से कहा कि विवेक के चले जाने के बाद मैं एक एक्सक्लूजिव खबर दूंगा। उस समय लंदन में तीन लोगों की गिरफ्तारी की खबर एजेंसी से आई थीजिनमें एक दाउद इब्राहिम होने का संदेह व्यक्त किया गया था। अनिल सिन्हा ने वह खबर संभाली और अपनी खबर लिखी। खबर का शीर्षक थादाउद इब्राहिम गिरफ्तारटाइगर मेमन की हत्या।

उस दिन प्रभाष जोशी बंबई में ही थे और राहुल देव के सामने केबिन में बैठे थे। अनिल सिन्हा ने वह खबर प्रभाषजी को दिखाई। प्रभाषजी ने खबर देखकर अनिल सिन्हा से पूछाखबर सही हैअनिल सिन्हा ने हां में जवाब दिया तो उन्होंने कहा कि पहले पेज पर लीड लगा दोबाकी संस्करणों में भी भेज देनाअपनी बाइलाइन लगाना मत भूलना। जब जावेद इकबाल वह खबर पेज पर लगवा रहे थेतब पेज लगवाने वाला आर्टिस्ट जमादार शर्त लगाने के लिए तैयार था कि यह खबर सही हुई तो मैं नौकरी छोड़ दूंगा। लोकसत्ता के पत्रकारों ने भी खबर देखकर हैरानी जताई कि हमारे किसी सोर्स से यह खबर कन्फर्म नहीं हो रही है। इंडियन एक्सप्रेस के पत्रकार भी हैरान थे। लेकिन जनसत्ता में वह खबर छपी।

प्रभाषजी के निर्देशों के बावजूद अनिल सिन्हा के कहने से जावेद इकबाल ने बाइलाइन नहीं लगाई थी। बंबई में वह खबर विशेष संवाददाता के नाम से छपी थी। खबर छपने के बाद स्तब्धता जैसी स्थिति थी। प्रभाषजी ने खबर का खंडन छापने की अनुमति नहीं दी और किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई या नहींयह भी पता नहीं। यह खबर छपने के बाद मैंने अपनी तरफ से अंग्रेजी में एक पत्र राहुल देव को लिखाजिसकी प्रतिलिपि प्रभाषजीप्रबंध संपादक और कार्मिक विभाग को भी भेज दी। इसमें मैंने सवाल उठाया कि यह गलत खबर कैसे छपीकौन जिम्मेदार हैइस पत्र से राहुल देव तिलमिला गए। उन्होंने मुझसे पूछा थाक्या हम इस्तीफा दे देंमैंने कहा थाआप अपने विवेक से जो भी चाहेंफैसला कर सकते हैं।

जनसत्ता में गलत खबर छपने के बाद मेरी मानसिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ा। नईदुनिया में कहां एक शब्द गलत हो जाने पर सख्त कार्रवाई हो जाती थी और यहां स्थानीय संपादक खुद जानबूझकर गलत खबर छपने में भूमिका निभाते दिखाई दे रहे थे। बंबई में बाल ठाकरे का विरोध करके कोई भी अपनी राजनीति साध सकता था। उनकी एक आदत यह भी थी कि अगर कोई शिवसेना के नाम से उपद्रव करेतो वे उसका खंडन नहीं करते थे। जब इंडियन मर्चेंट चैंबर के कार्यक्रम में तथाकथित शिवसैनिकों ने हंगामा किया थातब उसका भी बाल ठाकरे ने खंडन नहीं किया था। यही कारण था कि शिवसेना भवन के सामने देश के तमाम बड़े पत्रकार आ जुटे थे। इस तरह के घटनाक्रम के बीच राहुल देव बगैर कुछ लिखे पढ़े महान पत्रकार घोषित होने के रास्ते पर आगे बढ़ रहे थे। और जो गलत खबर छपीदाऊद इब्रहिम गिरफ्तारटाइगर मेमन की हत्याउसके बाद राहुल देव को अपना कद बढ़ाने का मौका मिल गया था।

तकनीकी तौर पर उस गलत खबर में राहुल देव की कोई भूमिका नहीं थी। अनिल सिन्हा ने खबर लिखी थी। प्रभाष जोशी ने उसे छापने की मंजूरी दी थी। बाकी संस्करणों में अनिल सिन्हा की बाइलाइन से छापने के लिए प्रभाषजी ने खुद फोन किया था। बारिश के दिनों में जब अचानक बिजली चमकती हैफिर लुप्त हो जाती है और वापस अंधकार बहाल हो जाता हैवैसी ही वह खबर थी। अचानक छपी और गुम हो गई। अंधकार में विलीन। उसका कोई फॉलोअप नहीं। बाद में कोई उस खबर को याद करना भी पसंद नहीं करता था। और यह प्रभाषजी के जीवन में बहुत बड़ा झटका था। वे दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से निबट गए। गलत प्रचार के आधार पर शिवसेना भवन के सामने धरना देकर बैठना और गलत खबर को छापने की मंजूरी देना उनसे होने वाली भीषण गलती थी। पहले वे संघ परिवार के विरोधी नहीं थेबाद में हो गए थे। इससे जनसत्ता का आर्केस्ट्रा भी बदला। राहुल देव ने बंबई में रहते हुए इसका फायदा उठाया। उन्होंने अपने बचे खुचे विरोधियों को मुख्य जिम्मेदारियों से हटाने के उपाय शुरू किए।