सरकारी सीनियर सैकंडरी स्तर के स्कूल के हालात बताती तस्वीर मांडल उपखंड के भीमड़ियास गांव की है। स्थानीय राजनीति का शिकार हुए गांव के इस स्कूल में 333 छात्र हैं, जिन्हें बैठाने के लिए कमरे नहीं बन पा रहे हैं। शिक्षकाें ने परिसर के बाहर अपने स्तर पर नेट लगवा रखी है। कक्षा 1 से 6 तक के कुछ बच्चाें काे पेड़ाें के नीचे बैठाकर क्लास लगाते हैं।

भवन में 8 कमरे हैं। 1 में कंप्यूटर कक्ष व एक में 1 प्रधानाचार्य का कार्यालय है। स्कूल में 4 कमरे, सभाकक्ष बनाने के लिए डीएमएफटी से 36 लाख 29 हजार रुपए स्वीकृत हुए। दो बार टेंडर हाे चुके हैं लेकिन उदासीनता के चलते काम नहीं हाे पा रहा। पहला टेंडर शिव शक्ति एजेंसी के नाम 14 अगस्त 2018 को जारी हुआ।

एजेंसी को काम 23 मार्च 2019 तक करना था। उसने 11 नवंबर 2019 को काम शुरू किया और कुछ ही दिन बाद बंद कर दिया। दाे बार नाेटिस देने पर भी काम शुरू नहीं हुआ ताे 26 नवंबर 2019 को टेंडर निरस्त कर दिया। 16 अक्टूबर 2020 को सुनिता टाइल्स एंड इंटरप्राइजेज के नाम टेंडर जारी किया गया। इस एजेंसी ने भी कुछ दिन बाद काम रोक दिया।

पूर्व प्रधानाचार्य विक्रमसिंह रावत ने कहा कि हमारा पूरा प्रयास था कि समय पर भवन बने। प्रधानाचार्य डॉ. बालमुकुंद सुखवाल ने कहा कि अधिकारियों को यह जानकारी दे दी है। चार दिन पहले ठेकेदार से खुदने भी बात की। हमारे स्तर पर एवं भामाशाह के सहयोग से व्यवस्था कर कक्षाओं का संचालन कर रहे हैं।