चित्तौड़गढ़ से गोपाल चतुर्वेदी की रिपोर्ट।
चित्तौड़गढ़ के सदर थाना अंतर्गत बहुचर्चित एनआरआई की कार चोरी मामले में 8 दिन से पुलिस के रिमांड पर चल रहे हिस्ट्रीशीटर और एनआरआई रमेश चंचलानी के बचपन का साथी नरेश ठक्कर की रिमांड अवधि खत्म होने के बाद न्यायालय में पेश किया गया जहां से उसे जेल भेज दिया गया। सदर थाना अधिकारी दर्शन सिंह ने बताया कि गत 14 अगस्त रात्रि को क्षेत्र के प्रताप नगर सिंधी कॉलोनी से एक एनआरआई रमेश चंचलानी की कार चोरी मामले में पिछले 8 दिनों से पुलिस रिमांड पर चल रहे आरोपी हिस्ट्रीशीटर नरेश ठक्कर को पुलिस रिमांड अवधि खत्म होने के बाद न्यायालय में पेश किया गया जहां से उसे जेल भेज दिया गया। वहीं उन्होंने बताया कि मुख्य आरोपी नरेश ठक्कर को गत महीने की 29 तारीख को गुजरात के अहमदाबाद शंकु वाटर पार्क से गिरफ्तार किया गया था। उसके बाद उसे 30 को न्यायालय में पेश कर पूछताछ के लिए 6 दिन का पुलिस रिमांड प्राप्त किया गया था। उसके पश्चात जांच में सहयोग नहीं करने के चलते न्यायालय में पेश कर 2 दिन का पुलिस रिमांड पर प्राप्त किया गया था जिसकी अवधि सोमवार को समाप्त होने के बाद न्यायालय में पेश किया गया जहां से उसे जेल भेज दिया गया। उन्होंने बताया कि 8 दिनों की पूछताछ के दौरान पुलिस ने आरोपी से कार चोरी से जुड़े कई तथ्यों पर पूछताछ की गईं है जिसमें प्रमुख तौर से टोल नाके पर आरोपी ठक्कर की ओर से दिखाए गए थ्री स्टार फर्जी पुलिस कार्ड, फर्जी नंबर प्लेट कार चोरी का प्रमुख उद्देश्य सहित कई अन्य सवालों के जवाब भी आरोपी से लिए हैं। वहीं जानकारी मे सामने आया एक अन्य मामले में वर्ष 2019 के आरोपी ठक्कर ने रमेश चंचलानी को एक चोरी की स्कॉर्पियो कार ढाई लाख रुपए में बेची थी,जिसके बाद में पुलिस ने इस को जप्त भी कर लिया था इस कार चोरी का प्रकरण निंबाहेड़ा सदर थाने में दर्ज हुआ था और बाद में कार को न्यायालय के आदेश के बाद मालिक को सौंप दिया गया था। इस मामले में पुलिस को चोर नहीं मिला था लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि उक्त कार भी संभवतः नरेश ठक्कर ने नहीं चुराई है लेकिन यह कार भी आरोपी ठक्कर ने रमेश चंचलानी को ही ढाई लाख रुपए में बेची थी और चंचलानी की रिपोर्ट पर यह प्रकरण दर्ज किया गया है इस मामले में अलग से ठक्कर की गिरफ्तारी की जाएगी। इस प्रकरण के साथ ही शहर कोतवाली में भी एक और प्रकरण दर्ज हुआ है जिसमें ठक्कर की भी भूमिका सामने आई है इस मामले के अनुसार एक पेट्रोल पंप की एनओसी के लिए ठक्कर ने राज्य सरकार की फर्जी मेल आईडी और उसे अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करवाकर पेट्रोल पंप आवेदक से करीब 13 लाख रुपए लिए थे इस मामले में भी एक और बड़े पत्रकार का नाम सामने आ रहा है फिलहाल यह मामला जांच में है आगामी दिनों में इस मामले में भी नरेश ठक्कर से पूछताछ होने की संभावना व्यक्त की जा रही है।


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