विशेष संवाददाता अवनीश पाराशर के साथ नादौती से देवा शास्त्री की रिपोर्ट।

करौली जिले के नादौती थाना अन्तर्गत ग्राम बेड़े का पूरा निवासी सैनिक कैलाश चन्द खटाना की दिल्ली मे शनिवार को उपचार के दौरान हुई मौत के बाद रविवार को सैनिक का पार्थिव शव पैतृक गांव बेड़े का पूरा (तेसगाँव)  पहुंचा। जहा पर सैनिक का सैन्य सम्मान के साथ हजारों लोगो की मौजूदगी मे अंतिम संस्कार किया गया। सैनिक की मौत से इलाके मे गांव मे शोक की लहर दौड पडी।

दरअसल युद्ध अभ्यास के दौरान घायल हुए सैनिक कैलाश की शनिवार को आर्मी अस्पताल दिल्ली में उपचार के दौरान मौत हो गई जिसके बाद सैनिक की सब को रविवार को उनके पैतृक गांव में लाया गया जहां पर सैन्य सम्मान के साथ सैनिक का अंतिम संस्कार किया गया। सैनिक की अंतिंम यात्रा में करौली धौलपुर सांसद डॉ मनोज राजोरिया ,टोडाभीम पूर्व विधायक घनश्याम मेहर ने कन्धा दिया।

 अंतिम यात्रा के दोरान जगह जगह पुष्प बर्षा कर ग्रामीणों ने सैनिक का स्वागत किया। अंतिम यात्रा में  हजारों लोग हाथों में तिरंगा लिये यात्रा में शामिल हुए जहा ग्रामीणो ने सैनिक की अंतिम यात्रा निकालते हुए जबतक सुरज चांद रहेगा कैलाश तेरा नाम रहेगा,भारत माता की जय,वंदेमातरम जैसे गगनभेदी नारे लगाये।सैनिक के शव के अत्योष्टी स्थल पर पहुंचने पर सेना के जवानो ने सैन्य सम्मान के साथ सैनिक कोअंतिम विदाई दी।

सैनिक के अतिम संस्कार मे टोडाभीम विधायक पी.आर मीणा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रकाश चन्द्र,अतिरिक्त जिला कलेक्टर,के साथ पुलिस प्रशासन के अधिकारी जनप्रतिनिधि सहित हजारों लोग मौजूद रहे।

बता दे, सैनिक कैलाश चन्द खटाना 31मार्च 2004 को भारतीय सेना में भर्ती हुआ था ओर जम्मू की 11 गार्डस  में हवलदार के पद पर तैनात था। देश की सीमा पर रक्षा के लिए तैनात सेना का हवलदार कैलास चन्द खटाना 20 अगस्त को  युधाभ्यास के दौरान गंभीर घायल हो गया था।जिसका दिल्ली आर्मी अस्पताल में उपचार चल रहा था। शनिवार को हवलदार कैलाश ने आर्मी अस्पताल में अंतिम सांस ली थी। पार्थिव शव को रविवार  को पैतृक गांव लाया गया।जहा सैन्य सम्मान के साथ अत्योष्टी की गई।

सैनिक ने 15 दिन पहले की थी परिजनो से वीडियो कॉलिंग पर बात।

युध्याभ्यास से एक दिन पूर्व 19 अगस्त को कैलाश ने मोबाइल पर वीडियो कॉलिंग पर पत्नी एवं अन्य घर वालों से बात की थी और कहा था कि प्रतियोगिता में जीत कर वह जल्द ही  घर लौट आएगा। लेकिन घर वालों को क्या पता था कि विधाता को और कुछ मंजूर था।परिजनों का रो रो कर बुरा हाल है। सैनिक  कैलाश चंद के परिवार में पिता भगवान सिंह ,मां धर्मोदेवी ,पत्नी सुनीता देवी तथा दो पुत्र और  एक पुत्री है।बड़े पुत्र हरेंद्र सिंह की आयु 12 वर्ष है, तथा आरती व आयुष जुड़वा हैं जिनकी  उम्र 10 वर्ष है।तीनो भाइयो में सैनिक कैलाश दुसरे नंबर का था। सबसे बड़ा लज्जाराम सेना में सूबेदार पद से रिटायर्ड है जबकि छोटा भाई मनीराम खेतीवाड़ी करता है।