राजीव गांधी की हत्या

ऋषिकेश राजोरिया 

दसवीं लोकसभा चुनाव के पहले चरण में 20 मई 1991 को 211 सीटों पर मतदान हो चुका था। अगले चरण के चुनाव प्रचार के तहत अगले दिन 21 मई 1991 की रात 10.10 बजे तमिलनाडु के श्रीपेरुंबदूर में चुनाव प्रचार के दौरान आत्मघाती हमले में राजीव गांधी की हत्या कर दी गई। इसके फलस्वरूप अगले दो चरणों के मतदान की तारीख बढ़ाई गई। अगले चरण का मतदान 12 जून और 19 जून को संपन्न हुआ। राजीव गांधी की हत्या के अगले दिन बंबई में इस कदर बंद था कि सारी सड़कें सुनसान थीं और सारी दुकानें बंद थी। कहीं भी आने जाने के लिए साधन उपलब्ध नहीं थे। मैं घाटकोपर में उस होटल में थाजहां बिपिन भाई ने चुनाव कार्यालय बना रखा था। मुझे शाम को बजे तक दफ्तर पहुंचना था। बिपिन भाई ने कहाकार में छोड़ आएंगे।

घाटकोपर से नरीमन पाइंट जाते समय रास्ते में कार का एक टायर पंचर हो गया। कोई मैकेनिक आसपास नहीं था। जैसे तैसे कार का टायर बदला गया। उस दिन मैं काफी देर से दफ्तर पहुंचा। अगले चरणों के चुनाव में बंबई की सीटों पर भी मतदान था। मैं बिपिन भाई के चुनाव प्रचार की खबरें कभी कभी जनसत्ता में लगा देता था। इसके अलावा मैं उनका और कोई सहयोग करने की स्थिति में नहीं था। चुनाव निबट गए। बिपिन भाई को तीन हजार से कुछ ज्यादा वोट मिले। कांग्रेस 232 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी। भाजपा 120 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही और जनता दल 59 सीटों के साथ तीसरे नंबर पर रहा। पामुलापर्ती वेंकट नरसिंहराव देश के प्रधानमंत्री बने। इस बीच बंबई में बारिश का मौसम शुरू हो चुका था।

एक रात ज्यादा बारिश हो रही थी तो मैं राहुल देव के घर पहुंच गयाजो कोलाबा के ससून डाक में रहते थे। वहां से सुबह चाय नाश्ता करके निकला तो फिर बारिश होने लगी। मेरा ठिकाना डोंबिवली में था और शाम को फिर दफ्तर पहुंचना था। जाने और वापस आने में कम से कम दो घंटे लगतेइसलिए दोपहर करीब 12 बजे मैं विद्योत्तमा के घर पहुंच गयाजो दफ्तर में साथ काम करती थी। उसका घर मेट्रो सिनेमा के सामने था।

विद्योत्तमा घर में नहीं थी। उसकी मां थीजिन्होंने मुझे सम्मान के साथ घर में बैठायाचाय पिलाईकहा कि विद्योत्तमा कान का इलाज कराने गई है। मैंने उन्हें समस्या बताई कि मैं डोंबिवली में रहता हूं और शाम को दफ्तर जाना है। अगर जाऊंगा और फिर बारिश तेज हो गई तो लौटकर दफ्तर जाना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने मेरी समस्या समझी। खाना खिलाया और कहा यहां सोफे पर लेट जाओ। मैं सोफे पर सो गया। नींद लग गई। साम चार साढ़े चार बजे उन्होंने फिर चाय बना दी। विद्योत्तमा तब तक नहीं लौटी थी। मैं चाय पीकर वहां से निकला और एक्सप्रेस टॉवर पहुंच गया। ड्यूटी के बाद रात दो बजे तक डोंबिवली पहुंच गया। अगले दिन शायद विद्योत्तमा ने राहुल देव से मेरी शिकायत कर दी थी।

राहुल देव ने मेरी जमकर खबर ली। कहाशर्म नहीं आई। लड़की के घर पहुंच गए। मैंने कहाशर्म आने जैसी क्या बात हैफिर भी अगर गलती हुई है तो माफी मांगता हूं। मेरा कोई गलत इरादा नहीं था। और मैंने अपनी पत्नी की फोटो भी उसकी मां को दिखाई थीजो मैं हमेशा अपने पर्स में रखता था। अपने बारे में पूरी जानकारी दी थी। और उनके व्यवहार से भी ऐसा नहीं लगा कि उन्हें कोई गंभीर एतराज है। अगर ऐसा होता तो वे चाय क्यों पिलातींखाना क्यों खिलाती और यह क्यों कहती कि रुक जाओ।

मेरी बात सुनकर राहुल देव ने कहाऔपचारिकता में किसी ने ऐसा कह दिया तो क्या वहीं पसर जाना चाहिएखैरजो होना थावह हो चुका थाआगे से ध्यान रखने की बात थी। लेकिन इस घटना के बाद विद्योत्तमा के साथ दफ्तर में मेरी बातचीत बंद हो गई। विद्योत्तमा एकदम नई पत्रकार बनी थी। वह इंडियन एक्सप्रेस के मार्केटिंग विभाग में नौकरी के लिए पहुंची थी। उसे हिंदी आती थीइसलिए मार्केटिंग वालों ने उसे जनसत्ता के संपादकीय विभाग में भेज दिया थाजहां हिंदी में काम करने वालों की बेहद जरूरत थी और राहुल देव महिला सशक्तिकरण के बहुत बड़े समर्थक थे। उन्होंने उसे जनसत्ता के संपादकीय विभाग में नियुक्त कर लिया था। वहां काम करते हुए उससे मेरी अच्छी बोलचाल हो गई थी। अपने घर का पता उसने ही मुझे बताया था और बारिश के कारण मैं चला गया था। लेकिन मेरा उसकी गैर हाजिरी में जानाचार घंटे उसके यहां रहना गलत हो गया। राहुल देव ने इसे बेहद असामान्य व्यवहार माना।