ब्यूरो रिपोर्ट।

प्रदेश में जिला परिषद और  पंचायत चुनाव के लिए चुनाव आयोग की ओर से हरी झंडी मिलने के बाद इस निर्णय को लेकर सरकार में भी सवाल उठने लगे हैं। चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा ने कहा है कि आयोग ने घोषणा करने से पहले हमसे कोई राय नहीं ली। उन्होंने माना कि प्रदेश में कोरोना का खतरा अभी टला नहीं है और इस महामारी को लेकर सभी को ज्यादा सतर्क रहने की आवश्यकता है। इस बारे में विशेषज्ञों का कहना है कि चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देने के साथ ही प्रदेश में कोरोना के आंकडे कम बताकर चुनाव कराने का  तर्क दिया है। जबकि विशेषज्ञों की राय है कि सरकार और आयोग मौजूदा परिस्थितियों के आधार पर चिकित्सा विशेषज्ञों की सलाह लेने के बाद उनकी राय को सुप्रीम कोर्ट में पेश करते और उसके बाद कोर्ट की ओर से जो भी आदेश आता उसकी पालना की जाती। आपको बता दें कि प्रदेश में कोरोना की दूसरी लहर के बीच अप्रैल महीने के दौरान हुए 3 विधानसभा क्षेत्रों के उपचुनाव और उससे पहले निकाय और पंचायत चुनाव में गाइडलाइन की जमकर धज्जियां उड़ाई गई थी। चुनाव के बाद कई नेता और कार्यकर्ता संक्रमित हो गए थे। इनमें से कई की तो मौत भी हो गई। प्रदेश में अब तक लगभग कई मंत्री और विधायकों सहित कई राजनीतिक दलों के सैकड़ों कार्यकर्ता और पदाधिकारी संक्रमित हो चुके हैं। इनमें से कोविड और पोस्ट कोविड से जुड़े कारणों से कुछ बड़े नेताओं सहित विधायक और कार्यकर्ताओं की मौतें भी हुई। एक सीट पर तो भाजपा प्रत्याशी भी प्रचार के दौरान संक्रमित हो गए और उन्हें जयपुर आकर आरयूएचएस अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। आपको पता बता दें कि जिन जिलों में चुनाव की घोषणा हुई है वहां 60 से 70% आबादी अभी वैक्सीन की पहली डोज से भी वंचित है।