विशेष संवाददाता अवनीश पाराशर के साथ सहयोगी महेंद्र पाल की रिपोर्ट

करौली जिले के मंडरायल पंचायत समिति के अधीन रोधई ग्राम पंचायत मे पीएम आवास योजना मे फर्जीवाड़ा का सनसनीखेज मामला सामने आया है.जहा कुटरचित दस्तावेजों के आधार पर मृतक एक दिव्यांग व्यक्ति के नाम का फायदा उठाकर दिव्यांग व्यक्ति के नाम के समान व्यक्ति ने 1 लाख 38 हजार रुपये की सहायता राशि उठा ली.जिसके बाद पीडित दिव्यांग परिजन ने सरपंच सचिव JEN सहित 7 लोगो के खिलाफ कोर्ट मे इस्तगासा दायर कर गुहार लगाई.जिसके बाद पुलिस ने आधा दर्जन धाराओं मे मामला दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है.इधर सनसनीखेज मामला सामने आने के बाद जहा कर्मचारियों मे हडकंप मच गया है.वही लोगो मे चर्चा का विषय बना हुआ है।

रोधई ग्राम पंचायत के गोपालपुरा निवासी भरोसी जाटव ने बताया कि वह दो भाई है.जिसमे बड़े भाई स्वरूप जाटव का 9 अक्टूबर 2020 को स्वर्गवास हो गया था.एव उसकी मां का भी 17 नवंबर 2018 को स्वर्गवास हो चुका है. प्रार्थी का भाई स्वरूप अविवाहित एवं शारीरिक रूप से गूंगा बहरा व विकलांग था. वर्ष 2011 में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्रार्थी के भाई स्वरूप जाटव का आवास स्वीकृत हुआ था, जिसकी स्वीकृति के बाद आपराधिक षडयंत्रपूर्वक प्रधानमंत्री आवास योजना की भाई स्वरूप की मंजूर  सुधा राशि रोधई निवासी रामस्वरूप जाटव ने दलाल व सरपंच सचिव से मिलीभगत करते हुए रुपए 1 लाख 38 हजार रुपये की राशि उठा ली। जबकि प्रार्थी के भाई को उक्त आवास की एक भी किस्त की राशि नहीं मिली. जिसकी जानकारी पीडित परिजन को इंटरनेट के माध्यम से लगने पर सीईओ जिला परिषद करौली व अन्य संबंधित अधिकारियों को मामले की सूचना दी तो जिला परिषद से यह आश्वासन दिया गया कि उसके भाई की राशि  वसूली की कार्यवाही रामस्वरूप जाटव से की जा रही है। इसके बाद मामले को लेकर परिजनो ने 21 जुलाई 2021 को मंडरायल थाने में गुहार लगाई, लेकिन मामले की रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई. तो परिजन भरोसी जाटव द्वारा जिला पुलिस अधीक्षक को डाक द्वारा अवगत कराया गया। लेकिन आज तक किसी भी अधिकारी द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गई। फिर पीडित भाई  भरोसी जाटव द्वारा कोर्ट मे इस्तगासा के जरिए 7 लोगों पर मंडरायल थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया. जिसके बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर धारा 406 420 467 468 471 एवं 120 बी के तहत मुकदमा दर्ज कर पुलिस जांच पड़ताल में जुट गई है. जल्द ही कार्रवाई का पीडित को भरोसा दिया गया है।