करौली से अवनीश पाराशर की रिपोर्ट
करौली जिला मुख्यालय पर प्राचीन काल से चली आ रही परपरां के तहत पंतगबाजी सोमवार को अपने परवान पर चढी। अलसुबह से ही युवा, बच्चे, नौजवानो की टोलीया मकानो की छत्तो पर पंतग बाजी का लुत्फ़ उठाते नजर आये। सिर्फ चारो तरफ वो काटा-वो मारा का शोर सुनने का मिला।पंतगबाजो ने पंतग उडाने के लिए एक दिन पहले खरीददारी शुरू कर दी। पंतगबाजी के शोकीन लोगो ने छत्तो पर डी.जे. और डेक मशीन तक की व्यवस्था की।
हालांकि बीच बीच मे बिगडे मौसम के मिजाज के चलते युवाओं को खलल जरूर पैदा हुई।लेकिन पंतगबाजी का जोश और जुनून खत्म नही हुआ। जैसे ही बरसात रूकती युवा छतो पर पंतगबाजी करते हुए नजर आये।बतादे करौली शहर मे जन्माष्टमी और रक्षाबंधन के मौके पर पतंगबाज़ी करने का बहुत पुराना इतिहास रहा है। यहां के लोगो की पतंगबाज़ी मे इस कदर रूचि है की लोग जन्माष्टमी के दिन अलसुबह ही घर की छतो पर चढ डीजे लगा पतंग उडाना शुरू कर देते है।यहां के लोगो पर जन्माष्टमी पर पतंग उडाने का भूत इस कदर सवार है की चाहे वह बच्चा हो या बडा सब घर की छतो पर चढ पतंग उडाने लग जाते हैं।



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