ब्यूरो रिपोर्ट।
प्रदेश के लगभग एक लाख से भी ज्यादा ऐसे भूखंडधारी जिन्होंने क्षेत्र का नियमन होने के बावजूद अभी तक पट्टे नहीं लिए उन पर, सरकार अब सख्ती करेगी। हाल ही में प्रशासन शहरों के संग अभियान की तैयारियों की दिशा में नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल की अध्यक्षता में हुई बैठक के दौरान यह सामने आया कि प्रदेश भर में 1लाख 4 हजार लोग ऐसे हैं जिन्होंने नियमन होने के बाद निर्माण तो करा लिया लेकिन अभी तक भूखंड का पट्टा नहीं लिया। अब नगरीय विकास विभाग की ओर से ऐसे लोगों को नोटिस दिए जाएंगे। इसके बावजूद यदि उन्होंने निर्धारित अवधि में पट्टा नहीं लिया तो कोर्ट में चालान पेश किए जाएंगे। बैठक के दौरान ऐसे मामले सामने आने के बाद यूडीएच मंत्री धारीवाल ने कहा कि निकायों के पास ऐसे भूखंड पर बन रहे निर्माण को हटाने या सील करने के अधिकार हैं। इस बारे में अफसरों का कहना था कि कॉलोनी का ले आउट प्लान अनुमोदित होने के बाद भी पट्टे नहीं लेने से नगरीय विकास निकाय के पास संबंधित भूखंड धारी से निर्धारित विकास शुल्क और अन्य चार्ज नहीं आते। जिसके चलते कॉलोनी में समय पर मूलभूत सुविधाएं भी नहीं पहुंच पाती। आपको बता दें कि बिल्डिंग बायलॉज में प्रावधान है कि ऐसे भूखंडों पर निर्माण नहीं किया जा सकता जिन के पट्टे जारी नहीं हुए हैं। यदि निर्माण हो गया तो उसे अवैध निर्माण माना जाता है। निर्माण हो रहा है तो निकाय के पास ये अधिकार है कि उस निर्माण को रोक दे। यदि निर्माण हो चुका हो और परिवार उस में रह रहा हो तो कोर्ट में चालान पेश किया जा सकता है। बिल्डिंग बायलॉज के अनुसार नियमन होने के तय की गई मियाद के बाद पट्टा लेने पर पेनल्टी और ब्याज वसूलने का प्रावधान है।


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