चित्तौड़गढ़ से गोपाल चतुर्वेदी की रिपोर्ट
जब -जब सरकार महापुरुषों को लेकर कोई भी कार्यक्रम चलाती है या फिर किसी महत्वपूर्ण योजना की शुरुआत करती है तो कार्यक्रम आयोजित करने वाले जिम्मेदारों को महापुरुषों की याद भी आ जाती है। कुछ ऐसा ही मामला चित्तौड़गढ़ में सामने आया है जहां एक तरफ जिलों में अगस्त क्रांति दिवस को महात्मा गांधी स्वच्छता सप्ताह के रूप में मनाने का आयोजन हो रहा था, वहीं दूसरी ओर जिला कलेक्ट्री चौराहे पर स्थित महात्मा गांधी प्रतिमा की सफाई तक नहीं की गई। हालात यह हुए की कार्यक्रम से कुछ ही मिनिट पहले स्काउट के कुछ लोगों ने अधिकारियों और नेता गणों की उपस्थिति में राष्ट्रपिता बापू की प्रतिमा को गंदा देख अपने जेब मे से रुमाल को निकालकर प्रतिमा को साफ करना शुरू किया तो वहीं प्रतिमा के आसपास एक ट्रॉली कचरा भी देखा गया।
जानकारी के अनुसार जहां पूरा देश और प्रदेश राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150 वीं जन्म जयंती का उत्सव मना रहा है, वहीं दूसरी ओर चित्तौड़गढ़ जिला मुख्यालय पर स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा धूल खा रही है और इसकी एक तस्वीर और साफ हो गई जब महात्मा गांधी दर्शन समिति के तत्वावधान में गांधी स्वच्छता सप्ताह का आगाज भी हुआ, वही जब जिला कलेक्टर परिसर से इस सप्ताह को मनाने के बाद जिम्मेदार गांधी दर्शन समिति के जिला संयोजक और अन्य प्रतिनिधि कलेक्ट्री चौराहे के समीप एक पार्क में लगी महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पहुंचे तो वहां पर देखा कि प्रतिमा के आसपास गार्डन में एक ट्रॉली से अधिक कचरा पड़ा होने के साथ ही राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर मिट्टी भी जमा हो रही थी जब इसकी जानकारी स्काउट- गाइड से जुड़े प्रतिनिधियों को मिली तो आनन-फानन में दो लोग सीढ़िया चढ़कर बापू की प्रतिमा के पास पहुंचे और अपनी जेब से रुमाल निकाल कर बापू की पूरी प्रतिमा को साफ करने लगे और ऐसे में कैमरे में वह तस्वीरें कैद हो गई,अब सवाल यह उठता है जिम्मेदार आयोजक स्वच्छता को लेकर कितने गंभीर है इसे लेकर बकायदा प्रशासनिक अधिकारीयों , स्काउट गाइड, जनप्रतिनिधियों और गांधी दर्शन समिति के लोगों ने बकायदा कार्यक्रम का आयोजन कर स्वच्छता सप्ताह की शुरूआत की और शपथ ली है कि हम स्वच्छता का ध्यान रखेंगे, लेकिन उसके उलट में चित्तौड़गढ़ के जिला कलेक्ट्रेट पर स्थित कलेक्ट्रेट चौराहे पर महात्मा गांधी की प्रतिमा के आसपास के झाड़ झंकार स्वच्छता की हकीकत को बयां कर रहे हैं, न केवल पेड़ पौधे बल्कि चौराहे पर लगी महात्मा गांधी की प्रतिमा भी लापरवाही का शिकार है जब शपथ ग्रहण के बाद अधिकारी और जनप्रतिनिधियों ने माल्यार्पण का कार्यक्रम करने के लिए गांधी प्रतिमा पर जाने का विचार किया तो पहले से ही मौके पर मौजूद स्काउट गाइड के जिम्मेदारों ने अपनी जेब से रुमाल निकाल कर प्रतिमा की सफाई शुरू की।ऐसे में साफ है कि गाहे-बगाहे मौके पर जब सरकार को महापुरुषों की याद आती है तो जिम्मेदार भी जागते हैं,भले ही देश में राजीव गांधी खेल रत्न का नाम बदलकर मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार किए जाने पर बवाल हो रहा हो, लेकिन महात्मा गांधी को विरासत मानने वाले जिम्मेदार भी तब जागते हैं जब या तो उन्हें महापुरुषों की लोकप्रियता को भुनाना हो या फिर नाम बदलने पर विवाद करना हो तो ही हम उस महापुरुष याद आते हैं बाकी सभी महापुरुष कचरे के ढेर में पड़े होते हैं तब उन महापुरुषों पर किसी का ध्यान नहीं जाता हैँ
क्या कहते है जिम्मेदार आयोजक
महात्मा गांधी दर्शन समिति के जिला संयोजक गोपाल सालवी ने खुद माना है कि अभियान की शुरुआत में ही महात्मा गांधी प्रतिमा के पास से ही लगभग एक ट्रैक्टर ट्रॉली कचरा निकला है।



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