खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने के लिए ‘फूड सेफ्टी निदेशालय’ बनाने का मुख्यमंत्री का सपना साकार करने के लिए सचिवालय के आला अधिकारी तैयारी में जुट गए है। चिकित्सा विभाग ने संभाग स्तर से लेकर ब्लॉक स्तर पर मिलावट रोकने के लिए लगने वाले स्टाफ, भवन और गाड़ी के लिए प्रस्ताव बनाकर वित्त विभाग को भेज दिया है। वित्त विभाग से हरी झंड़ी मिलने पर अस्थायी तौर पर ‘फूड सेफ्टी निदेशालय’ काम करने लगेगा। जिसका भवन औषधि नियंत्रण संगठन के ऊपर बनना प्रस्तावित है।

निदेशालय, ब्लॉक, जिला और संभाग स्तर पर करीबन 80 करोड़ रुपए बजट प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने वर्ष-2020-21 में प्रदेश के लोगों को क्वालिटी से युक्त खाद्य पदार्थ उपलब्ध करवाने के लिए ‘फूड सेफ्टी डाइरेक्टोरेट’ बनाने की घोषणा की थी। अब देखना ये है कि पहले तो वित्त विभाग की अनुमति और फिर चिकित्सा विभाग कितने दिनों में निदेशालय प्रारंभ कर आमजन को खाद्य पदार्थों में की जाने वाली मिलावट को रोक पाएगा।

निदेशालय में बैठने वाले ये अधिकारी
निदेशालय में बैठने वाले अधिकारियों में फूड सेफ्टी कमिश्नर, अतिरिक्त कमिश्नर, संयुक्त कमिश्नर, प्रशासनिक अधिकारी, विधि अधिकारी, वित्त एवं लेखा अधिकारी, खाद्य सुरक्षा अधिकारी के अलावा मंत्रालयिक कर्मचारी आदि। संभाग, जिला और ब्लॉक स्तर पर भी खाद्य सुरक्षा अधिकारी समेत अनेक अधिकारियों की नियुक्ति होगी।

ऐसा होगा मिलावट रोकने का सिस्टम : टोल फ्री नंबर, जिले का सीएमएचओ और ब्लॉक स्तर पर मिलावट की शिकायत मिलने पर संबंधित अधिकारी सूचना मिलने पर मौके पर जाकर कार्यवाही को अंजाम देगा। ये ही नहीं संबंधित अधिकारी को रिपोर्ट भी करेगा। जांच रिपोर्ट आने पर आमजन के लिए अलर्ट भी जारी करेगा। सरकार हर जिले के सीएमएचओ पर पहले से काम का दवाब होने से हर जिले में अभिहित अधिकारी के स्थायी पदों पर लगाएगा। जिससे काम प्रभावित नहीं होगा। इस पद पर उन्हें लगाने की योजना है, जिनके पास काम नहीं है।

फायदा : साल भर तक ‘शुद्व के लिए युद्व’ अभियान के तहत शिकायत से लेकर सैंपल लेकर जांच रिपोर्ट आने तक मॉनिटरिंग करेगा। इसके अलावा दूध, मसाले, तेल -घी और फल-सब्जी के लिए विशेष अभियान चलाएगा। पुलिस, बाट-माप तौल और विधि अधिकारी एक साथ रहने से मिलावट करने वाला सजा से नहीं बच पाएगा।

महाराष्ट्र, गुजरात की तर्ज पर बने एफडीए : विशेषज्ञों का कहना है कि राजस्थान में भी महाराष्ट्र, दिल्ली और गुजरात की तर्ज पर फूड और दवाओं के लिए फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) बनना चाहिए। जिससे न केवल खाद्य पदार्थों बल्कि नकली दवाओं पर आसानी से कार्यवाही की जा सकें। और दोनों पर मॉनिटरिंग भी आसान रहेगी।

10 साल में मात्र 2 को सजा : मिलावट करने वाले नाममात्र का जुर्माना देकर छूट जाने और कमजोर कानून के चलते हौसलें बुलंद है। राज्य में 5 अगस्त 2011 में फूड सेफ्टी एक्ट लागू होने के दस साल बाद आज तक मात्र दो को सजा मिली है। अगर लैब की जांच में सबस्टेंडर्ड और मिसब्रांड आने पर मामला एडीएम के यहां जाता है। और अनसेफ आने पर कोर्ट में जाता है। उल्लेेखनीय है कि सरकार ने मिलावट को गैर जमानती अपराध घोषित किया है। इसके लिए विधानसभा में पास हो चुका है, लेकिन मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा गया है।

खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने के लिए मुख्यमंत्री की ओर से फूड सेफ्टी डाइरेक्टोरेट बनाने की बजट घोषणा का क्रियान्वयन किया जा रहा है।
-डॉ. रघु शर्मा, चिकित्सा मंत्री