ब्यूरो रिपोर्ट। 

राजस्थान में विपक्ष लगातार सरकार पर आरोप लगा रहा है कि राजस्थान सरकार एसीबी को एक सरकारी मशीनरी की तरह इस्तमाल कर रही है। एसीबी पर सरकार के दबाव में काम करने के भी आरोप लगाए गए हैं।जबकि एसीबी डीजी बीएल सोनी ने आरोपों को बेबुनियाद बताया है।

दरअसल एसीबी के डीजी बीएल सोनी का कहना है कि एसीबी मुख्यालय की विशेष टीम या पूरे प्रदेश की कोई भी यूनिट राजनीतिक दबाव में नहीं है। एसीबी के सभी कर्मचारी और अधिकारी पूरे जोश के साथ भ्रष्टाचारियों का खात्मा करने मे लगे हुए हैं। पहले की तुलना में एसीबी की टीम अब ज्यादा तेजी के साथ कार्रवाई करते हुए न केवल भ्रष्टाचारियों पर नकेल कस रही है, बल्कि आय से अधिक संपत्ति के प्रकरण दर्ज करके कार्रवाई भी कर रही है। एसीबी डीजी बी.एल. सोनी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि पहले केवल कुछ ही विभागों में एसीबी की कार्रवाई देखने को मिलती थी। लेकिन अब पहले की तुलना में एसीबी की टीम काफी मजबूत हो चुकी है। अब हर तरह के विभाग में भ्रष्टाचार फैलाने वाले लोगों पर एसीबी की टीम नकेल कस रही है। वहीं भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाले न केवल छोटे अधिकारी बल्कि बड़े से बड़े अधिकारियों पर शिकंजा कसा जा रहा है। इसके साथ ही रिश्वत देने वाले और रिश्वत लेने वाले दोनों तरह के लोगों को प्रो-एक्टिव कार्रवाई करते हुए एसीबी की टीम दबोच रही है।

आमजन मे बढ़ा विश्वास

एसीबी डीजी बीएल सोनी ने कहा कि आमजन का विश्वास एसीबी के प्रति काफी गहरा हुआ है। आमजन से काफी शिकायतें रोजाना प्राप्त हो रही हैं।उन शिकायतों को आगे डवलप करके भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। इसके साथ ही केंद्र सरकार के 2 दर्जन से अधिक अधिकारियों को भी रिश्वत लेते हुए राजस्थान एसीबी ने रंगे हाथों दबोचा है।डीजी सोनी ने बताया कि बड़े अधिकारियों को ट्रैप करने के बाद बड़ी संख्या में अभियोजन स्वीकृति भी प्राप्त हो रही है।ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। डीजी का कहना है कि हर विभाग का अपना अलग-अलग दायित्व है, हमारा काम भ्रष्टाचारियों को पकड़ना है।उन्होंने कहा कि संबंधित विभाग के अध्यक्षों के अपने अलग दायित्व हैं।जो भारतीय संविधान के तहत ही काम कर रहे हैं। भारतीय संविधान के तहत ही संबंधित विभाग की ओर से अभियोजन स्वीकृति प्रदान की जा रही है।वर्तमान में एसीबी ने जितनी भी कार्रवाई को अंजाम दिया है उसमें 90% से अधिक प्रकरण में कोर्ट में चालान पेश किया जा चुका है।