आरक्षण विरोधी आंदोलन

ऋषिकेश राजोरिया 

विश्वनाथ प्रताप सिंह दिसंबर 1989 को देश के प्रधानमंत्री बने थे। व राजीव गांधी की भरपूर बहुमत वाली सरकार में वित्त मंत्री थे। लाइसेंस राज शिथिल करने के मामले उनकी सराहना हुई। उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय को ज्यादा अधिकार दिए। उनके वित्त मंत्री रहते धीरूभाई अंबानी और अमिताभ बच्चन जैसे लोगों के यहां छापे पड़े। बताया जाता है कि इसी लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने उनका विभाग बदलकर उन्हें रक्षा मंत्री बना दिया। उनके रक्षा मंत्री रहते हुए बोफोर्स घोटाला सामने आया। इसके बाद उन्हें मंत्रिमंडल से हटा दिया गया। तब उन्होंने कांग्रेस के साथ ही लोकसभा की सदस्यता छोड़ी और अरुण नेहरूआरिफ मोहम्मद खान के साथ मिलकर जन मोर्चा बनाया। फिर इलाहाबाद लोकसभा सीट से सुनील शास्त्री को मामूली अंतर से हराकर उपचुनाव जीते। 11 अक्टूबर 1988 को उन्होंने जन मोर्चाजनता पार्टीलोकदल और कांग्रेस (एसका विलय करते हुए जनता दल का गठन किया। इस तरह देश में राजनीति की नई धारा शुरू हो गई थी।

द्रमुकतेलुगू देशम पार्टी और असम गण परिषद जैसी नई क्षेत्रीय पार्टियां भी जबर्दस्त तरीके से उभरी और उनके सहयोग से राष्ट्रीय मोर्चा के नाम से नया राजनीतिक गठबंधन बना। वीपी सिंह इसके संयोजक थेएनटी रामाराव अध्यक्ष और पी उपेन्द्र महासचिव। राष्ट्रीय मोर्चा ने भाजपा और वामपंथी दलों के साथ तालमेल करके 1989 का चुनाव जीता था। चुनाव के बाद दिसंबर 1989 को संसद के सेंट्रल हाल में हुई बैठक में वीपी सिंह ने देवीलाल को नेता चुनने का प्रस्ताव रखा। देवीलाल ने प्रधानमंत्री बनने से इनकार करते हुए वीपी सिंह को नेता चुनने की घोषणा कर दी।

चंद्रशेखर ने उस समय कहा था कि देवीलाल ने धोखा किया। वे वीपी सिंह को पसंद नहीं करते थे। दिसंबर को वीपी सिंह ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ले ली। भाजपा और वाम मोर्चा ने बाहर से समर्थन दिया था। नईदुनिया में काम करते हुए इन घटनाओं में रुचि बनी रहती थी। इसी दौरान देश के प्रमुख राज्यों में बड़े पैमाने पर राजनीतिक परिवर्तन देखा गया और हरियाणाउप्रबिहार और ओडिशा में जनता दल की सरकारें बनीं। हरियाणा में ओम प्रकाश चौटालाबनारसी दास, हुकुम सिंहउप्र में मुलायम सिंह यादवबिहार में लालू प्रसाद यादव और ओडिशा में बीजू पटनायक ने सरकार बनाई। गुजरात में चिमनभाई पटेल मुख्यमंत्री बने। राजस्थान में जनता दल के सहयोग से भैरोंसिंह शेखावत मुख्यमंत्री बने।

राजनीतिक परिवर्तन के इस दौर में भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने सोमनाथ से अयोध्या तक रथयात्रा शुरू कर दी। पूरे देश में हिंदुत्व का माहौल बना। आडवाणी ने 30 अक्टूबर 1990 को अयोध्या में विवादित ढांचे की जगह राम मंदिर बनाने के लिए कार सेवा शुरू करने की घोषणा की थी। इससे पहले ही बिहार के समस्तीपुर में लालकृष्ण आडवाणी को गिरफ्तार कर लिया गया। भाजपा ने वीपी सिंह की सरकार से समर्थन वापस ले लिया। इससे सरकार अल्पमत में आ गई। सरकार बचाने के लिए वीपी सिंह ने मंडल आयोग की रिपोर्ट लागू करने की घोषणा की। संसद में उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया। देश भर में आरक्षण विरोधी आंदोलन शुरू हो गए।

आरक्षण के खिलाफ इंदौर के रीगल सिनेमा के सामने चौराहे पर भी कुछ लोगों ने अनशन किया था। उस जगह मैंने भी कुछ कार्टून बनाकर लगाए थेजिससे तपन भाईराजेन्द्र तोमर आदि नाराज हुए थे। तब मुझे पहली बार पता चला कि देश में जातिवाद कितनी बड़ी समस्या है। लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव के दौरान मत विभाजन हुआ। वीपी सिंह के खिलाफ 346 सदस्यों ने वोट दिया, 142 सदस्य उनके समर्थन में थे। नवंबर 1990 को वीपी सिंह को इस्तीफा देना पड़ा। मैं 1990 में जुलाई के बाद वापस प्रूफ टेबल पर काम करने लगा था। इस बार रात में ड्यूटी नहीं थी। दिन की ड्यूटी में काम करता था। भाजपा की कारसेवा की घोषणा से इंदौर में भी भगवा माहौल बन रहा था। सांप्रदायिक तनाव की परिस्थितियां बनने लगी थीं। इंदौर में दंगे हुए थे और कर्फ्यू भी लगा था। कर्फ्यू के दौरान मैंने पुलिस के डंडे भी खाए थे। संसद में वीपी सिंह की सरकार गिरने की स्थिति बनीतब मैंने चंद्रशेखर को एक पत्र लिखा था कि अब आपको देश की जिम्मेदारी संभालनी पड़ सकती है।