3260 गांवों में 8 लाख हेक्टेयर में फसलें बर्बाद, 5 लाख मैट्रिक अन्न उत्पादन घटेगा

बाड़मेर. जिले के रामसर गांव में पहली बारिश के बाद किसान खेताराम ने 50 बीघा जमीन पर बाजरे की बुआई की थी, लेकिन दूसरी बार बारिश नहीं होने से पूरी फसल जलकर नष्ट हो गई। ड्रोन एफर्ट: जीके बामणिया - Dainik Bhaskar
बाड़मेर. जिले के रामसर गांव में पहली बारिश के बाद किसान खेताराम ने 50 बीघा जमीन पर बाजरे की बुआई की थी, लेकिन दूसरी बार बारिश नहीं होने से पूरी फसल जलकर नष्ट हो गई। ड्रोन एफर्ट: जीके बामणिया
  • प्रशासन के सर्वे से पहले जिले के 3260 गांवों में सूखे के हालात की भास्कर ग्राउंड रिपोर्ट
  • बाड़मेर के साढ़े चार लाख किसानों को इस साल 20 अरब रुपए का नुकसान

भारत-पाक बॉर्डर पर आबाद बाड़मेर व जैसलमेर में दस साल बाद भीषण अकाल दस्तक दे चुका है। दोनों जिलों के करीब चार हजार गांवों में 75 दिन बाद बारिश नहीं होने से 80 फीसदी खरीफ की फसलें बर्बाद हो गई। सावन के बाद भादो में भी बारिश नहीं होने से पांच लाख किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें उभर आई है।

बैंकों व सेठ-साहूकारों से कर्ज लेकर खेती करने वाले किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। भास्कर टीम ने बाड़मेर के 500 गांवों में बारिश के अभाव में बने अकाल के हालात का पता किया तो चौंकाने वाली दास्तां सामने आई। एक माह पहले जिन खेतों में फसलें लहलहा रही थी, वहां पर 70 फीसदी फसलें जलकर जमींदोज हो चुकी है। 10 फीसदी फसलों पर धूल की चादर बिछ गई। अब सिर्फ 20 फीसदी फसलें ही बची है। मेहनत से अपनी तकदीर संवारनें वाले किसान फसल बर्बादी देखकर अपनी किस्मत को कोस रहे हैं।

औसत 365 के मुकाबले सिर्फ 183 एमएम बारिश, खरीफ फसलों में 80 फीसदी खराबा

बारिश के आंकड़े

  • जून: 50.13
  • जुलाई: 103.6
  • अगस्त: 13
  • औसत: 183

(बारिश एमएम में)

अन्नदाताओं के दर्द की कहानी उनकी जुबानी.... बुआई पर हजारों खर्च, तिनका भी हाथ नहीं आया

करीब 30 बीघा जमीन पर बुआई की। एक माह बाद फसलें लहलहाने लगी तो उम्मीद जगी कि इस बार कर्ज भी चुकता कर देंगे। लेकिन मानसून रूठ जाने से दो माह बाद भी बारिश की बूंद तक नहीं गिरी। फसलें जल गई। खेताराम मेघवाल, किसान, रामसर

लगातार पांचवें साल सूखा पड़ा है। इस साल बुआई की और दो माह तक रखवाली भी। फसलें बर्बाद हो गई, लेकिन पशुओं के लिए चारे-पानी की व्यवस्था बूते की बात नहीं है। हालत यह है कि पशुओं को पाले या बच्चों काे। -खुमाणसिंह सोढ़ा, किसान, बंधड़ा

इस बार आषाढ़ में अच्छी बारिश होने से सुकाल की आस जगी थी। गांव के किसानों ने रिकॉर्ड बुआई कर दी। फसलें भी उग गई, लेकिन लंबे इंतजार के बाद बारिश नहीं हुई। सुकाल की आस तो छोड़ चुके हैं। बैंकों से लिया कर्ज चुकाने की चिंता है। -चैनाराम, किसान, नेहरों की नाडी

गत साल भी आधे गांव में अकाल था। इस बार एक बारिश के बाद मानसून रूठ गया। इंतजार भी खूब किया,लेकिन बारिश नहीं हुई। बाजरे की 80 फीसदी फसलें बर्बाद हो गई। पांच-सात दिन में बारिश नहीं हुई तो शत फीसदी अकाल तय है।
-मगाराम चौधरी, किसान, बिसारनिया

खरीफ फसल उत्पादन व नुकसान एक नजर में

खेतों में जली फसलें व चारों ओर सन्नाटा

रामसर, गडरारोड, शिव समेत जिले के 15 तहसील क्षेत्र में 80 %फसलें बारिश के अभाव में जलकर नष्ट हो चुकी है। देरासर, बोला,रामसर, गागरिया के खेतों में सन्नाटा पसरा है। रामसर के हेमाराम बताते हैं कि 50 बीघा में बाजरा बोया था। बारिश नहीं होने से जलकर नष्ट हो गया।