सिरोही,  जिले में सामने आए SBM वॉल पेंटिंग घोटाले के बाद अब एक और घोटाला सामने आया हैं, जो नरेगा वॉल पेंटिंग के नाम पर किया गया हैं... चौकान्ने वाली बात यह हैं कि इस घोटाले के मास्टरमाइंड भी वो ही लोग हैं, जिन्होंने SBM वॉल पेंटिंग घोटाले की व्यूहरचना रची थी... यानी जिले के कलेक्टर, जिला परिषद के सीईओ और पंचायत समितियों के बीडीओ के साथ साथ उन्ही ठेकेदार ने इस घोटाले को अंजाम दिया हैं, जिन्होंने SBM वॉल पेंटिंग की पटकथा लिखी थी... 

जिले में नरेगा एक्ट के तहत लाभार्थियों के नामों को सार्वजनिक करने के लिए सार्वजनिक स्थलों की दीवारों पर नरेगा में कार्य करने वाले मज़दूरों के नाम लिखने का कार्य जिला स्तर पर ऑनलाइन एक टेंडर जारी कर या फिर ब्लॉक स्तर पर ऑनलाइन टेंडर जारी करके ये कार्य करवाया जाना चाहिए था, पर जिम्मदारो ने ऐसा नही करके जिले की लगभग सभी ग्राम पंचायतों में यह काम अपनी मनमर्जी से अपने मनपसंद ठेकेदार से करवा दिया... और उसने इस कार्य का करीब डेढ़ करोड़ रुपये का बिल भी अलग अलग पंचायत समितियों के बीडीओ को पेश करवा दिया गया..

. लेकिन SBM वॉल पेंटिंग घोटाला उजागर हुआ तो इस नरेगा वॉल पेंटिंग घोटाले को दबाने के लिए सभी पंचायतों के ग्राम विकास अधिकारियों से 3-3 कोटेशन मंगवाकर इस घोटाले पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही हैं... जबकि नियमानुसार नरेगा एक्ट के तहत करवाए जाने वाले कार्यो की ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए, ये कार्य 3-3 कोटेशन के आधार पर करवाया ही नही जा सकता... 



◆ नरेगा एक्ट में 3 कोटेशन का नही हैं प्रावधान


नरेगा कार्य के लिए ग्राम पंचायतों से 3-3 कोटेशन लेकर किसी भी कार्य को नही करवाया जा सकता, ये नरेगा एक्ट में बने नियमों में साफ लिखा हुआ। बावजूद इसके सिरोही जिले की पंचायत समितियों में नरेगा वॉल पेंटिंग का कार्य ग्राम पंचायतों से 3-3 कोटेशन लेकर ये कार्य करवाया गया। जिसमें पिंडवाड़ा पंचायत समिति ने करीब 40 लाख का भुगतान भी ठेकेदार को किए जाने की सूचना मिल रही हैं। जब ठेकेदार को कार्य कोटेशन के आधार पर ग्राम पंचायत द्वारा जारी किया गया था तो उसका भुगतान भी ग्राम पंचायत स्तर पर ही होना चाहिए था। लेकिन ऐसा नही करके भुगतान पंचायत समिति से जारी करना अपने आप में बड़े घोटाले की और इंगित करता हैं। वहीं अगर नियमो की बात करें तो नरेगा कार्य के लिए सरकार द्वारा जारी फंड सेंट्रलाइज होता हैं तो इसे कोई भी अधिकारी डी-सेंट्रलाइज कैसे कर सकता हैं? 


"सेंट्रलाइज फंड को डी-सेंट्रलाइज नही किया जा सकता, यदि ऐसा हुआ हैं तो शिकायत करवा दीजिए, जांच करवा देते हैं"


मेरी जानकारी में ऐसा मामला नही आया हैं। नरेगा का फंड सेंट्रलाइज होता हैं, उसे डी-सेंट्रलाइज नही किया जा सकता। इस कार्य की टेंडर प्रक्रिया ब्लॉक स्तर पर ही की जा सकती हैं। यदि ग्राम पंचायतों से 3-3 कोटेशन लेकर कार्य करवाया गया हैं तो आप इसकी शिकायत करवा दीजिए, हम इसकी जांच करवा देते हैं।

◆भगवतीप्रसाद कलाल, जिला कलेक्टर सिरोही

सिरोही से गणपत सिंह मांडोली की रिपोर्ट।