अजमेर से नवीन वैष्णव की रिपोर्ट।
अजमेर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने जिला परिषद के सीईओ के नाम पर सहायक विकास अधिकारी को 11000 रुपए की रिश्वत के साथ रंगे हाथ गिरफ्तार किया। आरोपी ने ग्राम पंचायत के निरीक्षण में मिली खामियों को छिपाने के लिए रिश्वत की मांग की थी। फिलहाल एसीबी आरोपी से पूछताछ कर रही है। एसीबी की निरीक्षक मीरा बेनीवाल ने बताया कि ग्राम पंचायत टॉडगढ़ का 19 जुलाई को जिला परिषद के सीईओ गौरव सैनी और सहायक विकास अधिकारी मुकेश कांकाणी ने निरीक्षण किया था। जिसमें कई कमियां सामने आई थी। इन कमियों को छिपाने के लिए मुकेश कांकाणी ने सीईओ द्वारा 16 हजार रुपए मौके पर ही मांगे जिसमें से 5 हजार रुपए हाथों हाथ ले लिए। जबकि 11 हजार रुपए देने को भी कहा। सरपंच चंपा देवी के बेटे धर्मवीर सिंह ने इसकी शिकायत एसीबी को दी और आज सत्यापन के बाद रंग लगे नोट लेकर आरोपी के पास भेजा गया। आरोपी मुकेश कांकाणी ने रुपए लेकर शौचालय में छिपा दिए। जिसे बरामद कर लिया गया। निरीक्षक मीरा बेनीवाल ने कहा कि फिलहाल सीईओ द्वारा पैसे मांगने की बात सामने नहीं आई है लेकिन इसकी जांच की जा रही है।
वहीं इस बारे में जब सीईओ गौरव सैनी से बातचीत की तो उन्होंने कहा कि रिश्वत मांगने के संबंध में कोई आइडिया नहीं है। नियम के अनुसार 24 घंटे बाद कांकाणी को सस्पेंड कर दिया जाएगा।इस कार्रवाई में सवाल यह उठता है कि जब सीईओ की मौजूदगी में कमियां पकड़ी गई तो इनको छिपाने के संबंध में आखिरकार सहायक विकास अधिकारी अकेले कैसे यह रिश्वत ले सकता है?
फिलहाल एसीबी तो कांकाणी को ही दोषी मान रही है जो कि गले उतरने जैसी बात नहीं है।


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