श्रीगंगानगर से राकेश मितवा की खबर 

       पंजाब से राज्य की गंगनहर और आईजीएनपी में हर साल की तरह इस बार भी आ रहा भारी मात्रा  प्रदूषित और गंदा पानी राज्य के लिए बहुत बड़ी समस्या बन गया है ।

      हरिके बैराज से  छोड़ा गया   काले रंग का  बदबूदार पानी राज्य की और बहने वाली नहरों में लगातार आ रहा है ।          हनुमानगढ़ क्षेत्र की इंदिरा गांधी नहर परियोजना व श्रीगंगानगर के गंग नहर में यह गंदा पानी ज्यादा नजर आ रहा है। यह पानी पंजाब के लुधियाना शहर की औद्योगिक इकाइयों का अपशिष्ट बताया जा रहा है। लुधियाना शहर की औद्योगिक इकाइयों से पानी बुड्ढा नाला के जरिए सतलुज नदी से हरीके बेराज तक पहुंचता है और यहीं से राजस्थान की नहरों में आता है ।  प्रदूषित पानी राज्य की नहरों में लगातार पहुंच रहा है इस प्रदूषित पानी को रुकवाने के लिए आंदोलन कर रही एनजीओ व किसानों के पदाधिकारी  के अनुसार इसकी शिकायत प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को भी दी गई है।

        इस गंदे पानी में लेड और एलमुनियम नाइट्रेट आर्सेनिक तथा यूरेनियम की भी काफी मात्रा है। इससे मानसिक विक्षिप्तता, मिर्गी, गुस्सा, कैंसर अल्जाइमर पेट की बीमारियां, बच्चों में पोषक तत्व की कमी के साथ-साथ आंखों की समस्या में किडनी फेल होने तथा महिलाओं में गर्भपात होने का खतरा भी बढ़ सकता है। 

        स्थानीय नेताओं व किसान प्रतिनिधियों की चिंताओं को देखते हुए मुख्य सचिव निरंजन आर्य ने पंजाब सरकार को पत्र लिखकर इस पानी को रोकने का आग्रह किया है। पत्र में एनजीटी के उस फैसले का हवाला दिया है जिसमें यह स्पष्ट किया गया है कि गंदा पानी रोकना पंजाब की जिम्मेदारी है।

          दरअसल हरिके बैराज से नहर में पानी छोड़ा गया था इस काले रंग के पानी आने की सूचना पर जलदाय विभाग काफी हरकत में आया है।  इधर श्रीगंगानगर में भी इस गंदे पानी को लेकर लोगों में लगातार आक्रोश बढ़ता जा रहा है ।  जलदाय विभाग की डिग्गियों में भंडारित पानी को शुद्ध करने के बाद ही सप्लाई करने की बात कही है,

        दूषित जल असुरक्षित कल जन जागरण समिति के पदाधिकारियों ने भी जलदाय विभाग के अधीक्षण अभियंता से मिलकर उन्हें ज्ञापन सौंपा और पंजाब से आ रहे गंदे पानी को शुद्ध करने के बाद ही पेयजल के रूप में सप्लाई करने , पानी को शुद्ध करने के लिए प्रभावी योजना बनाने तथा पानी की विभिन्न स्तर पर जांच कर लैबोरेट्री व्यवस्था करने नेहरू में आ रहे प्रसूति प्रदूषित पानी की समुचित जांच कर राज्य सरकार को अवगत कराने की बात कही है।   ज्ञापन में समाजसेवी महेश पेड़ीवाल, रमजान, सुरेंद्र स्वामी मोहनलाल गुप्ता, सीता राम विश्नोई आदि लोग शामिल रहे।

         गौरतलब है कि पंजाब से जिले की नहरों में गंदा पानी आने की हर साल की समस्या है हर साल इन्हीं दिनों में यह गंदा पानी लगातार आता रहता है।    

        पंजाब का नहरों के लिए प्रमुख जल स्रोत सतलुज नदी को वर्ष 2020 तक प्रदूषण मुक्त रखने का दावा भी खोखला ही साबित हो रहा है।

          स्थानीय जनप्रतिनिधियों सांसद निहालचंद मेघवाल श्रीगंगानगर विधायक राजकुमार गौड़, करनपुर विधायक गुरमीत कुन्नर सहित अनेक जनप्रतिनिधियों ने भी केंद्रीय जल संसाधन मंत्री के साथ-साथ राज्य सरकार को भी पत्र लिखकर यह प्रदूषित पानी रुकवाने की मांग की है ।

       गौरतलब है कि गत वर्ष भी किसान प्रतिनिधियों के साथ-साथ राज्य सरकार के प्रयासों के बाद पंजाब सरकार द्वारा लुधियाना में तीन ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की बात कही गई थी। एक प्लांट लगा, जो अपर्याप्त है ।

       दरअसल राजस्थान नहर और भाखड़ा नहर के साथ-साथ गंग नहर को प्रदूषण नहर को पानी उपलब्ध करवाने वाली सतलुज नदी को प्रदूषण मुक्त होने में अभी काफी समय लगने की संभावना है वजह यह कि लुधियाना और इसके आसपास औद्योगिक इकाइयों के लिए 105 एमएलडी क्षमता के तीन ईटीपी यानी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से अभी 15 एमएलडी तक ही का ही एक प्लांट शुरू हुआ है ऐसे में जब तक वहां तीनों ईटीपी शुरू नहीं होते तब तक वहां का करीब से6 हजार लाख लीटर अपशिष्ट व प्रदूषित पानी हमारी नहरों में लगातार आता रहेगा।

          पंजाब और राजस्थान की यह विडंबना ही है कि राज्य में और पंजाब में चाहे किसी भी पार्टी की सरकार बने लोगों की जिंदगी और से खिलवाड़ कर रहे प्रदूषित पानी को रोकने के लिए कभी भी प्रभावी कदम नहीं उठाए । 

         इधर श्रीगंगानगर  के कालूवाला, खखां, शिवपुर हेड से विभाग ने पानी के नमूने जांच के लिए लिए हैं, जिसकी रिपोर्ट  आज आने की संभावना है  । अफसोस है कि विभाग और राज्य सरकारें जब तक प्रभावी कदम उठाएगी तब तक इन नहरों में लाखों लीटर गंदा प्रदूषित जल यहां के खेतों और डिग्गियों में पहुंच चुका होगा और लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहा होगा मगर सरकारों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता ।।