ब्यूरो रिपोर्ट।
गहलोत सरकार भले ही ओलंपिक पदक विजेताओं को सरकारी नौकरी और जमीन देने की प्रोत्साहन योजनाओं का दम भरती हो लेकिन प्रतिभावान खिलाडियों की असल मौके पर मदद के मामले में सरकार फीसड्डी साबित हो रही है। हालत यह है कि प्रदेश के चार ओलंपिक खिलाडियों को अपने खर्चे पर इस विश्वस्तरीय प्रतियोगिता में जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। युवा खेल मंत्री अशोक चांदना के विभाग ने इन चारों की की कोई मदद नहीं की है। ऐसे में अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर ओलंपिक क्वालीफाई करने वाले अपूर्वी चंदेला, दिव्यांश पवार, भावना जाट औरअर्जुन जाट अब अपने ही वित्तीय संसाधनों से अगले महीने होने वाले टोक्यो ओलंपिक में भाग लेंगे। उल्लेखनीय है कि अपूर्वी व दिव्यांश निशानेबाजी में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे तथा भावना एथलेटिक्स में व अर्जुन रोइंग स्पर्धा में ओलंपिक में खेलेगा। कोविड और ब्लैक फंगस से जूझ रहे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को तत्काल इस मामले में दखल देकर इन चारों खिलाडियों के आने-जाने के खर्चे का जिम्मा उठाकर अपनी खिलाडियों के प्रति नीति स्पष्ट करनी चाहिए।





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विषय पर माननीय मुख्यमंत्री महोदय को ज़रूर ऐक्शन लेना चाहिए
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