ब्यूरो रिपोर्ट। 

जिले के निम्बाहेड़ा क्षेत्र के गांव चरलिया ब्राह्मण में एक मकान के गोदाम में कोतवाली पुलिस और जिला स्पेशल टीम ने छापा मार कर वहां मिलावटी रंगों से धनिये की पॉलिश का पर्दाफाश किया। शुक्रवार देर रात शुरू हुई पुलिस कार्रवाई आज सुबह तक चली, पुलिस ने मौके से 943 कट्टे बरामद किए, जिसमें 340 क्विंटल 40 किलो धनिया था।


छापे के दौरान पुलिस ने कोटड़ीकलां ग्राम पंचायत के चरलिया ब्राह्मण स्थित एक मकान के गोदाम में नीमच का एक व्यापारी 62 वर्षीय राजेश कुमार पुत्र फतेह लाल अग्रवाल मशीन की सहायता से धनिये पर मिलावटी रंगों से पॉलिश कर उन्हें चमका कर ऊंचे कीमतों पर मार्केट में बेचने का काम करने वाले को को मौके से पकड़ा। राजेश अग्रवाल ने यहां मकान किराए पर ले रखा था। सूचना मिलने पर निम्बाहेड़ा कोतवाली थाना पुलिस और जिला स्पेशव टीम ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए छापा मारा और 943 से अधिक कट्टे धनिये के मिले। पुलिस द्वारा जब्त किए गए धनिया की कीमत करीब 35 लाख रुपये बताई जा रही है,

सैंपल लेने के लिए फूड इंस्पेक्टर महेश कुमार सिहाग को भी मौके पर बुलाया गया, पुलिस अधीक्षक दीपक भार्गव के निर्देश पर भदेसर डिप्टी एसपी भी मौके पर पहुंची, पुलिस ने धनिया के सैंपल लेकर गोदाम को सील कर दिया और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया, इस पॉलिश से धनिये की कीमत चार गुनी से भी अधिक हो जाती है, यह धनिया बाजार में एलीफेंट ब्रांड,  कैमल ब्रांड, एमपी गोल्ड, स्कुटर ब्रांड, ग्रीन इंडिया तथा अंकुर ब्रांड आदि नाम से बिकता था, जिसके कट्टे गोदाम से बरामद हुए है,

मकान मालिक की भूमिका की जांच


आरोपी राजेश ने बताया कि नीमच मध्य प्रदेश की प्रशासन व्यापारियों के खिलाफ काफी सख्त कार्रवाई कर रहे थे, इससे घबराकर वह मध्य प्रदेश-राजस्थान बॉर्डर के पास के गांव में एक किराए का मकान ले लिया और इस बात का भी ध्यान रखा कि वह घर एकांत जगह पर हो। पुलिस का कहना है कि यह घर बाबूलाल पुत्र शंकर लाल धाकड़ निवासी गांव चरलिया ब्राह्मण का है। मकान मालिक भी इस मामले में शामिल है या नहीं, इस बात की जांच चल रही है।

खतरनाक सल्फर केमिकल का इस्तेमाल


पुलिस ने बताया कि पुराने खराब धनिया गोदाम में भर रखे थे, 340 क्विंटल 40 किलो धनिया रखा हुआ था, इसमें से केमिकल वाले 18 हजार 440 किलो धनिया थे, जबकि बिना केमिकल के 15 हजार 600 किलो थे, पुलिस ने यह भी बताया कि इन धनिये में सल्फर और अन्य केमिकल लगाकर मशीनों के सहायता से इन्हें नया रूप दिया जाता है। पॉलिश करने पर यह बिल्कुल नए धनिये जैसे लगता है। ग्राहकों को पता भी नहीं चलता है कि यह ओरिजिनल नहीं है, लेकिन ग्राहकों के इसको इस्तेमाल करने से जिंदगी भी खत्म हो सकती है।

एमपी, गुजरात तक थी जहर की पहुँच 


प्रारंभिक जांच में आरोपी राजेश ने बताया कि वह नीमच में काम करता था। 2 महीने पहले ही प्रशासन की सख्ती के बाद राजस्थान में आकर यह मिलावट का काम करने लगा। यहां से एमपी, गुजरात और अन्य कई राज्यों में इसकी सप्लाई करता है। हालांकि जांच अभी भी जारी है और यह भी पता किया जा रहा है कि माल कहां कहां भेजा जाता है? पुलिस ने भादसा की धारा 420, 269, 272, 273, 278, 483 में मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी।