ब्यूरो रिपोर्ट,  प्रदेश से कोरोना की दूसरी लहर विदाई ले रही है। अभी तीसरी लहर की केवल आशंका जताई जा रही है। फिलहाल तीसरी लहर आने के स्पष्ट संकेत नहीं है, लेकिन इसी बीच कोरोनावायरस से ठीक हो चुके बच्चों ने एक नई बीमारी ने पांव पसार लिए हैं। चिकित्सा जगत में इसे मल्टी सिस्टम इन्फ्लेमेटरी सिंड्रोम यानी एमआईएस कहा जा रहा है। 


एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले 6 महीने में ही राजस्थान में कोरोना से उबर चुके लगभग 500 बच्चों में मल्टी ऑर्गन फेल होने के मामले सामने आए हैं। राजधानी जयपुर के जेके लोन में ही पिछले 2 महीने के दौरान 60 मामले सामने आए हैं। जिनमें से 8 बच्चों की तो मौत भी हो चुकी है। 

लगभग 6 माह से लेकर 15 साल आयु तक के बच्चे इस भयानक बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। इन बच्चों में ज्यादातर ऐसे हैं जिनमें परिजनों के चलते कोरोना हुआ था।  ज्यादातर तो सिंप्टोमेटिक रहे हैं लेकिन बाद में एंटीबॉडी बनी और इस एंटीबॉडी की वजह से अन्य ऑर्गन और शरीर की कोशिकाएं नष्ट होने का सिलसिला शुरू हो गया। चिकित्सकों के अनुसार पूर्व संगठन से ज्यादा प्रभावित बच्चों में दो तरह के बदलाव सामने आ रहे हैं।


ऐसे बच्चों में निमोनिया या फिर एंटीबॉडी से संबंधित इन्फ्लेमेशन भी देखा जा रहा है। बच्चों में एमआईएसके लक्षणों मे पहले बुखार आता है और उसके बाद शरीर के महत्वपूर्ण अंग जैसे दिल और फेंफड़े, यहां तक कि ब्रेन भी प्रभावित होता है। 3 से 5 दिन तक तेज बुखार रहता है। पेट में तेज दर्द और ब्लड प्रेशर अचानक गिरने लगता है। इस खतरनाक बीमारी से शरीर के कई अंगों में एक साथ इन्फ्लेमेशन भी हो जाता है।

 इसके चलते तेज बुखार, सांस लेने में तकलीफ, पेट में दर्द, आंतों में रक्त स्त्राव, पीलिया या बेहोशी तक के लक्षण सामने आते हैं। और यदि इस रोग की गंभीरता हुई तो बच्चों में पैरालिसिस तक हो सकता है और खून का थक्का जमने से जान भी जा सकती है। इंडियन एकेडमी आफ पीडियाट्रिक्स इंटेंसिव केयर चैप्टर की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार कोरोनावायरस की लहर तक देश भर में लगभग 2000 से भी ज्यादा बच्चे मल्टी सिस्टम इन्फ्लेमेटरी सिंड्रोम यानी एमआईएस से पीड़ित मिले हैं।