हनुमानगढ़ से विश्वाश कुमार की रिपोर्ट।
हनुमानगढ न्यायालय परिसर में राज्य वृक्ष खेजड़ी के हरे-भरे छायादार पेड़ों को ठेकेदारों द्वारा काटने के मामले ने जमकर तूल पकड़ लिया है।आहत के नाराज बिश्नोई समाज ने ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। जिला न्यायालय परिसर में सार्वजनिक निनिर्माण विभाग के अधीन फैमली कोर्ट भवन का निर्माण हो रहा है।निर्माण के दौरान ठेकेदार ने परिसर में लगे वर्षों पुराने खेजड़ी के लम्बे-छोड़े दर्जनों पेडों को पल भर में जमीदोंज कर दिया इतना ही नही बिश्नोई समाज के अधिकवक्ताओ द्वारा हाल ही में दर्जनों नए पेड़ भी लगाए गए थे उनको भी मिट्टी के नीचे दबा दिया।ख़ास बात ये की सिद्धू कंस्ट्रक्शन कंपनी के पास पेड़ो की कटाई की अनुमति तक नही है।इसके बावजूद दर्जनों राज्य वृक्षो को काट दिया गया।पेड़ों की कटाई की खबर जब बिश्नोई समाज के लोगो को लगी तो पर्यावरण प्रेमी बिश्नोई समाज के लोग न्यायालय परिसर में एकत्रित हो गए व पेड़ों की कटाई से आहत समाज के लोगों ने ठेकेदारों पर एफआईआर दर्ज करने व फर्म का लाइसेंस रद्द करने की मांग की,
साथ हो उन्होंने आंदोलन की चेतावनी देते हुए कहा कि एक तरफ सरकार ने खेजड़ी के पेड़ के फायदों को देखते हुए इसके सरक्षण के मध्यनजर इसको राज्य पेड़ घोषित किया हुआ है।दूसरी तरफ सरकारी विभागों के अधीन चल रही कंस्ट्रक्शन कम्पनियां इनकी हत्या कर रही है।साथ ही मौके पर पहुंचे अखिल भारतीय जीव रक्षा बिश्नोई सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष साहिब राम बिश्नोई व वरिष्ठ अधिवक्ता रामकुमार बिश्नोई ने मामले में मुख्यमंत्री से मिलने की बात भी कही है।साहिब राम बिश्नोई ने वन विभाग पर आरोप लगाते हुए बताया कि समाज के लोग वन विभाग में शिकायत करने पहुंचे तो वह विभाग में ये कहकर पल्ला झाड़ लिया कि जहां पेड़ लगे है,वो जगह उनकी नही है।
पेड़ों को पूजने व हरित हनुमानगढ की मुहिम का हिस्सा बिश्नोई समाज के विनित बिश्नोई भी पेड़ो की कटाई से काफी नाराज व आहत है।उनका कहना है कि एक तरफ लोग कोरोनाकाल में भी वृक्षों की अहमियत नही समझ रहे है।व उनको काट रहे है,वही दूसरी तरफ रामकुमार बिश्नोई जैसे अधिवक्ता भी है,जिन्होंने कोर्ट में स्थित अपने चैम्बर की परवाह नही करते हुए छत में छेद करवा खेजड़ी के पेड़ को बचाया,तो ऐसे पेड़ काटने वालो के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
विवाद की स्थिति होने पर मौके पर जक्शन पुलिस भी पहुंची व हमने इस बाबत सिद्धू कंस्ट्रक्शन कंपनी के ठेकेदार व जक्शन थानाधिकारी से पूछा तो ठेकेदार ने पेड़ो को काटने की परमिशन नही होने की बात कबूल की तो वही जक्शन थानाप्रभारी नरेश गेरा ने कहा कि जिस तरह का समाज के लोग परिवाद देंगे उसी तरह की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
धार्मिक व औषधीय महत्व भी कम नही
खेजड़ी वृक्ष की महत्ता इस बात से ही आंकी जा सकती है कि जोधपुर के खेजड़ली गांव में खेजड़ी को बचाने के लिए वर्ष 1730 में अमृता देवी सहित 363 लोगों ने प्राणों का त्याग तक दे दिया था।इसके नीचे बरसात में बेल वाली सब्जियां जैसे लोकी, तुरई की बुवाई कर वर्ष पर्यन्त उपज ली जा सकती है।व खास बात ये की विक्रम संवत 1956 वें अकाल में लोगों ने खेजड़ी को भोजन के रुप में उपयोग में लिया था। इसकी पत्तियां भेड़ बकरियों के भोजन का काम करती है। साथ ही इसकी सूखी पत्तियों को खाद के रुप में काम में लिया जाता है।अगर इसी तरह विकास की एवज व निजी स्वार्थों के चलते प्रदेश के राज्य वृक्ष "खेजड़ी" (Existence Of State Tree "Khejdi") के पेड़ कटते रहे तो वो दिन दूर नही बहुगुण इस पेड़ का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।
कानून के जानकार बताते है कि सरकार द्वारा घोषित राज्य वृक्ष खेजड़ी के पेड़ को काटने के आरोप में इंडियन फॉरेस्ट एक्ट 33 के तहत बिना अरेस्ट वारंट भी आरोपियों को गिरफ्तार किया जा सकता है।





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