बात 24 साल पहले की है । 


छोटे भाई विकास की शादी के अगले दिन होने वाले आशीर्वाद समारोह में क़व्वाली रखने का तय हुआ । 


सईद भाई से गुज़ारिश की , सुन कर वे बोले "मियाँ आपके छोटे भाई की शादी है , मैं और फ़रीद दोनों आयेंगे , इंशाअल्लाह रंग जमेगा , ऐसी महफ़िलें रोज़ थोड़े ही नसीब होती हैं ।" 


14 नवम्बर 1997 को वो शाम सजी । सईद भाई और फ़रीद ने वो रंग जमाया कि लोग नाचने लगे । 


सुनने वाले लोगों में प्रमुख थे - 


पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर , तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोसिंह शेखावत , पूर्व वित्त मंत्री मानिक चन्द सुराणा , पण्डित रामकिशन , मास्टर रामशरण अंत्यानुप्रासी , गिरधारी लाल भार्गव , उजला अरोड़ा , माहिर आज़ाद , राजेन्द्र राठौड़ , महेश जोशी , रघु शर्मा , राम करण गुर्जर , रघुवीर सिंह शेखावत , वी एस सिंह , पी एन रछोया , पी डी सिंह , डॉ. ताराप्रकाश जोशी , हरिराम आचार्य , कल्याण सिंह राजावत , रघुराज सिंह हाड़ा , डॉ.भगवतशरण चतुर्वेदी , मेघराज 'मुकुल' , रामनाथ कमलाकर , चन्द्रकुमार सुकुमार , वीर सक्सेना , बुद्धिप्रकाश पारीक , चम्पालाल चौरड़िया , देव नारायण आसोपा , शीलकान्ता आसोपा , विशम्भर नाथ उपाध्याय , इक़बाल नारायण , आर एन सिंह , राही शहाबी , प्यारे मियाँ , निशात हुसैन , इनाम शरर , इज़हार मसर्रत , फ़रीद अय्यूबी , शान्ता बाली 'रौशन' , बलराम खोसला 'वाकिफ़' , लक्ष्मी नारायण 'फ़ारिग' , डी आर मदान 'होश' , प्रकाश नारायण जौहरी , करन प्रकाश गोयल 'असर' , सुदर्शन पानीपती , ख़ुर्शीद अहमद 'सहर' , मुमताज़ शकेब , मुश्ताक अहमद 'राकेश' , इकराम राजस्थानी ,  प्रकाश शुक्ला , कैलाश मिश्र , ओम सैनी , विनोद भारद्वाज , गोपाल शर्मा , श्रीपाल शक्तावत , धीरज कुलश्रेष्ठ , आशा पटेल , गोपाल सैनी , शंभूदयाल बडगूजर , प्रताप सिंह , अखिल शुक्ला , सोमेन्द्र शर्मा , शिवचरण माली , सुरेश मिश्रा आदि आदि (बहुत से नाम छूट भी रहे हैं) । 


सईद भाई और फ़रीद को नज़राने भी ख़ूब पेश किये गये । 


कार्यक्रम के उपरान्त खाना खाकर जब सईद भाई , फ़रीद और उनकी टीम जाने लगी तो मैंने धीरे से सईद भाई की जेब में एक लिफ़ाफ़ा रख दिया जिसमें ग्यारह हज़ार रुपये थे । 


सईद भाई ने वो लिफ़ाफ़ा निकाला , उसमें से रुपये बाहर निकाले , फ़रीद से माँग कर इक्कीस सौ रुपये लिये , ग्यारह हज़ार में वो इक्कीस सौ मिलाये और नीलम (विकास की पत्नी) की गोद में धर उसके सर पर हाथ फेरते हुए निकल पड़े । 


ऐसे थे हमारे सईद साबरी ।


मैं जानता हूँ सईद भाई कि फ़रीद के जाने के बाद आप अन्दर ही अन्दर कितने टूट गये थे । लेकिन ये जानलेवा साइलेन्ट कार्डियक अरैस्ट इतनी जल्दी आकर आपको भी हमसे दूर ले जायेगा , इसका पता न था । 


शायद आपको भी लग गया होगा कि "देर न हो जाये कहीं देर न हो जाये ।" 


मेरा भीगा सलाम ले लो सईद भाई , फ़रीद को भी मेरा प्यार कहना ।


लोकेश कुमार सिंह 'साहिल'

(लेख में प्रस्तुत विचार लेखक के अपने हैं। Rajkaj.News की इन विचारों से सहमति अनिवार्य नहीं है। किंतु हम अभिव्यक्ति की स्वंत्रता का आदर करते हैं।)